Delhi Water Logging: दिल्ली में एनएच-24 पर जलभराव से हाहाकार, बारिश ने खोली सरकारी दावों की पोल, आप ने भाजपा को घेरा
राजधानी दिल्ली में सोमवार सुबह से लगातार हो रही भारी बारिश ने नगर निगमों और सरकारी एजेंसियों की तैयारियों की पोल खोल दी है। खासकर पूर्वी दिल्ली के पटपड़गंज इलाके से गुजरने वाले दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (एनएच-24) पर हालात बेकाबू हो गए। पूरा क्षेत्र गहरे जलभराव की चपेट में आ गया और सड़कें नदी जैसी दिखाई देने लगीं। जलजमाव के चलते लंबा जाम लग गया और दफ्तर जाने वाले लोग, स्कूली वाहन और आम नागरिक घंटों फंसे रहे।
स्थानीय लोगों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह समस्या हर साल मानसून में सामने आती है, लेकिन प्रशासन और सरकार की ओर से कोई स्थायी समाधान अब तक नहीं किया गया। बारिश शुरू होते ही यह एक्सप्रेसवे जलभराव का शिकार हो जाता है, जिससे लोगों को हर बार भारी असुविधा उठानी पड़ती है।
इस मुद्दे पर अब सियासत भी गरमा गई है। आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। आप की पूर्व पार्षद और महिला नेत्री गीता रावत ने विरोध प्रदर्शन करते हुए जलभराव वाले इलाके में नाव चलाकर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज किया।
गीता रावत ने इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दो साल पहले की घटना को याद दिलाया जब भाजपा के मौजूदा विधायक रविंद्र सिंह नेगी ने इसी स्थान पर नाव चलाकर आम आदमी पार्टी और तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को कटघरे में खड़ा किया था। उन्होंने कहा, “आज जब नेगी जी खुद विधायक हैं, एमसीडी और केंद्र में भाजपा की सरकार है, तब भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। क्या अब वह खुद को जिम्मेदार मानते हैं?”
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी इस प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए भाजपा सरकार पर तंज कसा। उन्होंने ट्वीट किया, “यह नाव सरकारी नहीं है मगर भाजपा सरकार के योगदान को विशेष नमन।”
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है। भारी बारिश के कुछ ही घंटों में इलाके की प्रमुख सड़कें पानी में डूब गईं, जिससे वाहन बंद हो गए और कई बाइक सवार गिरते-पड़ते दिखाई दिए।
लोगों का आरोप है कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का निर्माण तकनीकी खामियों से भरा है और यहां उचित ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाया गया। नतीजतन, हर साल यहां पानी भर जाता है और हजारों लोगों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।



