Faridabad BPL Protest: फरीदाबाद में बीपीएल परिवारों पर महंगाई की दोहरी मार, सरसों तेल की कीमत 40 से 100 रुपये होने पर उभरा जन आक्रोश
हरियाणा के फरीदाबाद में एक जुलाई से बीपीएल परिवारों को सरकार की एक चुपचाप नीति परिवर्तन ने करारा झटका दिया है। सरकार ने जिन परिवारों को अब तक 40 रुपये में सरसों का तेल उपलब्ध कराया जा रहा था, अब उन्हें वही तेल 100 रुपये में खरीदना पड़ रहा है। इस अचानक हुई 60 रुपये की भारी बढ़ोतरी ने गरीबी रेखा के नीचे जीवन जीने वाले हजारों परिवारों की कमर तोड़ दी है।
जहां पहले बीपीएल कार्ड धारकों को सस्ती दरों पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराकर राहत दी जा रही थी, वहीं अब ऐसा लग रहा है कि यह राहत धीरे-धीरे छीनी जा रही है। बीपीएल कार्डधारकों का कहना है कि इस फैसले ने उनके घर के बजट को बिगाड़ दिया है और अब हर महीने राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की खरीद एक गंभीर चुनौती बन गई है।
स्थानीय निवासी और लाभार्थी सुषमा देवी ने कहा, “हम पहले जैसे-तैसे घर चलाते थे, अब तेल जैसे जरूरी सामान की कीमत इतनी बढ़ा दी गई है कि रसोई का खर्च ही नहीं निकल पा रहा। गरीबों के लिए सरकार को राहत देनी चाहिए थी, ये कैसा न्याय है?” वहीं एक अन्य कार्डधारक राकेश कुमार ने बताया कि, “सरकार सब्सिडी खत्म कर रही है, लेकिन हमारी आमदनी तो नहीं बढ़ रही। महंगाई की मार और ऊपर से राहत भी छीन ली गई—अब हम क्या करें?”
राजनीतिक हलकों में भी इस मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि वह गरीबों की भलाई के नाम पर योजनाएं शुरू करती है और फिर चुपके से उन पर मार कर देती है। इस फैसले को जनविरोधी करार देते हुए सरकार से तेल की कीमतें तत्काल घटाने की मांग की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जहां केंद्र सरकार पहले ही ईंधन, रेल किराए और गैस सिलेंडरों की कीमतें बढ़ा चुकी है, वहीं अब राज्यों द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी खत्म करने की प्रवृत्ति ने गरीब वर्ग के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे समय में जब महंगाई दर लगातार ऊंचाई पर बनी हुई है, सरकारों से अपेक्षा की जाती है कि वे राहत पैकेज और अनुदान योजनाएं मजबूत करें, न कि उन्हें कमजोर करें।



