हिजाब नियमों का उल्लंघन करने वाली 22 वर्षीय महिला की पुलिस हिरासत में मौत के बाद प्रदर्शनकारियों और ईरानी सुरक्षाबलों के बीच झड़पों में अब तक कम से कम नौ व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। ईरान में जारी अशांति हाल के कई वर्षों में सबसे खराब स्थिति में जा पहुंची है। विरोध प्रदर्शन का सिलसिला फिलहाल थमता नहीं दिखाई दे रहा है। नाराज प्रदर्शनकारी एक दर्जन शहरों में सुरक्षा और अर्धसैनिक बलों से संघर्ष कर रहे हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन के एक प्रस्तोता ने दावा किया कि इन प्रदर्शनों में अब तक 17 लोग मारे जा चुके हैं, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया है कि उनकी जानकारी का क्या स्रोत है। विरोध पर सरकार की कार्रवाई की जानकारी अन्य लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर रोक लगाई गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारियों ने इन घटनाओं को बाहरी दुनिया तक पहुंचने से रोकने के लिए यह कदम उठाया है, जबकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार अशांति के समय हमेशा इस तरह के कदम उठाती है। ईरान में प्रदर्शनों का यह सिलसिला ईरान की धर्माचार पुलिस द्वारा सख्ती से लागू किए गए ड्रेस कोड के उल्लंघन के मामले में लिए गिरफ्तार युवती महसा अमिनी की उत्पीड़न के बाद मौत के बाद शुरू हुआ और बाद में बड़े आंदोलन के रूप में फैल गया। महसा अमिनी की मौत की अमेरिका, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने कड़ी निंदा की है।
ईरान में मौजूदा हिंसा अमिनी की मौत के बाद शुरू हुई
ईरान में मौजूदा हिंसा उत्तर-पश्चिमी कुर्द शहर की युवती अमिनी की मौत के बाद शुरू हुई, जिसे पिछले हफ्ते तेहरान में देश की नैतिकता पुलिस ने सख्त ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उसकी मृत्यु पर पश्चिमी देशों और संयुक्त राष्ट्र ने ईरान की तीखी निंदा की है और घटना से पूरे देश में आक्रोश फैल गया है। वीडियो में दिखता है कि अमिनी ने अपनी गिरफ्तारी के समय एक लंबा काला गाउन (अबाया) और सरकार द्वारा अनिवार्य किया गया इस्लामिक हिजाब पहना हुआ था। घटना के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं हिजाब के विरोध में सड़कों पर उतर आई हैं और ‘‘स्वतंत्रता’’ के नारों के बीच कई महिलाओं द्वारा हिजाब जलाए जाने के वीडियो सामने आए हैं। कुछ लोग शासन पर इस्लामी धर्मगुरुओं का प्रभाव खत्म किए जाने का आह्वान कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी ‘तानाशाह को मौत’ और ‘मुल्लाओं को जाना होगा’ जैसे नारे लगाते नजर आते हैं। राजधानी तेहरान से लेकर अमिनी के कुर्द गृहनगर साकेज़ तक कम से कम 13 शहरों में हजारों ईरानी लोग सामाजिक और राजनीतिक दमन का आरोप लगाते हुए सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।



