ISI Agent: 14 साल से भारत में छिपा था कथित ISI एजेंट, गिरफ्तारी पर पूर्व RAW एजेंट ने की बंगाल STF की तारीफ
पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की ओर से एक संदिग्ध पाकिस्तानी ISI एजेंट की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा व्यवस्था और भारत-नेपाल सीमा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पूर्व NSG कमांडो और कथित पूर्व RAW एजेंट लकी बिष्ट ने इस कार्रवाई को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी बताया है। उनके मुताबिक गिरफ्तार संदिग्ध की पहचान राणा रऊफ उर्फ वहाब आलम के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर पाकिस्तान के फैसलाबाद का रहने वाला है।
बताया जा रहा है कि आरोपी भारत में करीब 14 वर्षों से रह रहा था। लकी बिष्ट के मुताबिक, वह वर्ष 2012 में नेपाल के रास्ते भारत में दाखिल हुआ था और इसके बाद पश्चिम बंगाल में रह रहा था। हाल ही में पश्चिम बंगाल STF ने उसे उस समय गिरफ्तार किया, जब वह कथित तौर पर भारत से बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहा था।
लकी बिष्ट ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में पश्चिम बंगाल STF की कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक भारत में रह रहे किसी संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ना सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने इस तरह के ऑपरेशन को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम बताया।
पूर्व कमांडो ने भारत-नेपाल सीमा की प्रकृति को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा होने के कारण दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही अपेक्षाकृत आसान है। इसी वजह से सुरक्षा के लिहाज से यह व्यवस्था चुनौती भी पैदा कर सकती है और गलत तत्व इसका फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया इकाइयों के लिए देश में मौजूद हर व्यक्ति की गतिविधियों पर लगातार नजर रखना संभव नहीं है। ऐसे में आम नागरिकों की सतर्कता भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि किसी व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध नजर आती हैं या उसके व्यवहार से किसी गैरकानूनी या देशविरोधी गतिविधि का संदेह होता है तो इसकी जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित सुरक्षा एजेंसी को दी जानी चाहिए।
लकी बिष्ट ने लोगों से अपील की कि किसी संदिग्ध व्यक्ति के खिलाफ खुद कार्रवाई करने की कोशिश न करें। इसके बजाय उसकी गतिविधियों की जानकारी कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों तक पहुंचाएं। उनका कहना है कि समय रहते मिली छोटी-सी सूचना भी संभावित बड़े खतरे को रोकने में मदद कर सकती है।
उन्होंने हाल में उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुई कुछ गिरफ्तारियों का भी संदर्भ दिया और कहा कि सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध नेटवर्क और गतिविधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रही हैं। उनके मुताबिक, देश की सुरक्षा केवल पुलिस और खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की जागरूकता भी इसमें अहम भूमिका निभाती है।
बंगाल STF की कार्रवाई के बाद अब जांच एजेंसियां आरोपी के भारत में रहने के दौरान उसके संपर्कों, गतिविधियों और कथित नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी हैं। यदि जांच में उसके किसी आतंकी या जासूसी नेटवर्क से जुड़े होने की पुष्टि होती है तो मामले में आगे और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
हालांकि, आरोपी के ISI से कथित संबंधों और उसके लंबे समय तक भारत में रहने से जुड़े सभी दावों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल उसकी गिरफ्तारी ने भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा और संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं।



