स्कूलों के नाम शहीदों के नाम पर रखना दिल्ली सरकार का अच्छा निर्णय : रीना महेश्वरी
ट्रिपल इंजन सरकार कर रही है शहीदों का सम्मान
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : दिल्ली सरकार स्कूलों के नाम शहीदों के नाम पर रखने जा रही है जो कि सरकार का एक बेहतरीन कदम है ,सरकार के इस कदम से शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि होगी और आने वाली पीढ़ियों को शहीदों दिए बलिदान के बारे में पता चलेगा | यह कहना है अशोक नगर वार्ड से भारतीय जनता पार्टी की निगम पार्षद रीना महेश्वरी का |
रीना महेश्वरी कहती हैं दिल्ली सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व निर्णय ले रही है उन्ही निर्णयों में से एक यह बेहतरीन निर्णय है | रीना महेश्वरी कहती है अब दिल्ली के सरकारी स्कूल सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं रहेंगे, बल्कि देशभक्ति और प्रेरणा के प्रतीक बनेंगे. दिल्ली सरकार की योजना है कि स्कूलों का नाम अब उन शहीदों के नाम पर रखा जाए, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए. इसका उद्देश्य बच्चों के मन में राष्ट्रीय जिम्मेदारी और बलिदान की भावना को जगाना है |
रीना महेश्वरी कहती है राजधानी दिल्ली के अनेक सैनिक देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए है उनकी याद में सरकार स्कूलों और अन्य शिक्षण संस्थाओं का नाम रखेगी इससे बड़ा सम्मान हमारे जाबांजों को मिलेगा और उनके परिजनों के साथ-साथ अन्य सैन्य परिवारों में एक अच्छा संदेश भी जाएगा | यह केवल स्कुलोंका नाम बदलने का ही नहीं अपितु एक नये युग की शुरुवात होगी दूसरे शब्दों में एक पूरी कहानी होगी | एक ऐसी कहानी जो हर बच्चे को रोज याद दिलाएगी कि हिम्मत, त्याग और देशभक्ति क्या होती है? तब यहां पढ़ने वाला हर बच्चा कहेगा, ‘मैं शहीद कैप्टन अनुज नैयर स्कूल में पढ़ता हूं, दिल्ली सरकार की यही वो सोच है जो जल्द ही हकीकत बन सकती है. बीते शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के शिवाजी कॉलेज में करगिल विजय दिवस के मौके पर हुए एक कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने स्कूलों का नाम बदलने के बारे में बताया |
रीना महेश्वरी कहती है दिल्ली सरकार का यह कदम सराहनीय है सभी को इस निर्णय की सराहना करनी चाहिए तथा दूसरे राज्यों की सरकार को भी इस निर्णय से प्रेरणा लेनी चाहिए | रीना महेश्वरी कहती हैं शिक्षा मंत्री श्री सूद नें ने खासतौर पर कारगिल युद्ध के हीरो कैप्टन सुमित रॉय, कैप्टन हनीफ-उद-दीन और कैप्टन अनुज नैयर का नाम लिया. तीनों वीर शिवाजी कॉलेज के पूर्व छात्र थे और 1999 के युद्ध में शहीद हो गए | उनके परिवार वाले भी कार्यक्रम में मौजूद थे. सुमित रॉय की मां, स्वप्ना रॉय को मंच पर बुलाया गया और कॉलेज ने उनका सम्मान किया | शिक्षा मंत्री ने बताया कि स्कूलों के नाम बदलने की यह पहल सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि बच्चों के मन में नागरिक जिम्मेदारी और देश प्रेम का जज्बा पैदा करने की नीयत से है. उन्होंने कहा कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों की कहानियां किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि स्कूल की इमारत और माहौल में जीवित रहें |
रीना माहेश्वरी कहती है आशीष सूद मानते हैं कि जब स्कूल का नाम आपके ही इलाके के किसी शहीद के नाम पर होगा, तब उसकी कहानी बच्चों को शेयर करना आसान होगा. तब बच्चों को महसूस होगा कि ये हमारे ही मोहल्ले के, हमारे जैसे लोग थे, जो देश के लिए जी-जान से लड़े. मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का भी जिक्र किया, जो केंद्र सरकार ने बनवाया है. वहां रोज एक शहीद के परिवार को सम्मानित किया जाता है. वही भावना अब स्कूलों तक भी ले जाने पर विचार चल रहा है | रीना महेश्वरी कहती है दिल्ली सरकार की इस योजना को वे दिल से सलाम करती हैं |



