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LPG gas shortage Delhi: सोई गैस की किल्लत के चलते मिट्टी के चूल्हे की ओर लौटने लगे परिवार नन्द नगरी एक परिवार नें चूल्हे पर ही बना डाला दावत का खाना

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LPG gas shortage Delhi: सोई गैस की किल्लत के चलते मिट्टी के चूल्हे की ओर लौटने लगे परिवार
नन्द नगरी एक परिवार नें चूल्हे पर ही बना डाला दावत का खाना

नई दिल्ली ( रविन्द्र कुमार ) : देश के कई हिस्सों में रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत और बढ़ती कालाबाजारी ने आम परिवारों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित किया हुआ है। राजधानी दिल्ली सहित कई शहरों में उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। कहीं सप्लाई में देरी है तो कहीं जमाखोरी और कालाबाजारी के आरोप लग रहे हैं। इस स्थिति ने कई परिवारों को मजबूरी में पुराने पारंपरिक तरीकों की ओर लौटने पर विवश कर दिया है। इसी संकट के बीच दिल्ली के एक परिवार ने अपने तीन वर्षीय बेटे का जन्मदिन ऐसे मनाया, जो आज की परिस्थितियों में संघर्ष, सादगी और पारिवारिक प्रेम की मिसाल बन गया। दिल्ली के नंद नगरी इलाके में रहने वाले विराज ठाकुर का तीसरा जन्मदिन हाल ही में उसके परिवार ने बड़े ही स्नेह और अपनापन के साथ मनाया।

विराज के पिता पवन कुमार और माता नीलम रानी ने सोचा था कि बेटे का जन्मदिन घर पर ही छोटे से पारिवारिक समारोह के रूप में मनाया जाएगा, जिसमें करीब 40 रिश्तेदार और परिचित शामिल होंगे। परंतु जन्मदिन से ठीक पहले परिवार को पता चला कि रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। आसपास के कई गैस एजेंसियों और दुकानों पर पूछताछ करने के बाद भी सिलेंडर नहीं मिला। ऐसी स्थिति में परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मेहमानों के लिए भोजन की व्यवस्था करना था। लेकिन बेटे का जन्मदिन अधूरा न रह जाए, इसके लिए परिवार ने एक अलग ही रास्ता चुना। विराज की बुआ राखी और बहन अवनी व किशटू ने घर की छत पर मिट्टी का पारंपरिक 2 चूल्हे तैयार किए । फिर उन्ही चूल्हों पर लकड़ी और कोयले की मदद से खाना बनाया गया। परिवार की महिलाएं और पुरुष सभी मिलकर तैयारी में जुट गए। किसी ने आटा गूंथा, किसी ने सब्जी तैयार की और कोई चूल्हे पर रोटियां और पूरियां सेंकने लगा। धीरे-धीरे पूरा माहौल किसी पुराने गांव की रसोई जैसा बन गया।

मिट्टी के चूल्हे से उठता धुआं, लकड़ी की आंच पर पकता खाना और परिवार के सदस्यों की हंसी-मजाक ने समारोह को एक अलग ही रंग दे दिया। इस मौके पर परिवार के सदस्य रचना, राखी, नवीन कुमार, बंटी, शीतल और राजेश कुमार सहित विराज की बहनें अवनी, किशटू और श्री भी मौजूद रहीं। सभी ने मिलकर विराज का जन्मदिन मनाया और मेहमानों की मेहमान नवाजी की। परिवार का कहना है कि गैस सिलेंडर की कमी के कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा, लेकिन इस अनुभव ने उन्हें एक नई सीख भी दी। उनके अनुसार, “भले ही परिस्थितियां मुश्किल थीं, लेकिन पूरे परिवार ने मिलकर जिस तरह से जन्मदिन मनाया, वह शायद पहले कभी इतना यादगार नहीं रहा।” मेहमानों ने भी इस अनोखे आयोजन की सराहना की। कई लोगों ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं के बीच हम पारंपरिक तरीकों को भूल चुके हैं, लेकिन इस मौके ने उन्हें पुराने दिनों की याद दिला दी। गौरतलब है कि देश के कई हिस्सों में इन दिनों एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सप्लाई व्यवस्था को समय पर दुरुस्त नहीं किया गया और कालाबाज़ारी पर सख्ती से रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में आम परिवारों की रसोई पर इसका असर और भी गहरा हो सकता है। वहीं विराज ठाकुर का यह जन्मदिन इस बात की मिसाल बन गया कि मुश्किल हालात में भी परिवार का साथ, सादगी और प्रेम किसी भी कमी को महसूस नहीं होने देता। कई बार सुविधाओं से ज्यादा मायने उन पलों का होता है, जो पूरे परिवार को एक साथ जोड़ देते हैं।

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