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राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2026 में डॉ. बसंत गोयल को गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में सम्मानित किया गया – हर्ष भारद्वाज

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राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2026 में डॉ. बसंत गोयल को गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में सम्मानित किया गया – हर्ष भारद्वाज

नई दिल्ली, भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित भारत मंडपम में आयोजित भव्य समारोह “राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2026” में गोयल मेडिकोज के सीईओ एवं संस्थापक, विश्व-प्रसिद्ध समाजसेवी डॉ. बसंत गोयल को विशेष अतिथि एवं गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में सम्मानित किया गया। यह आयोजन देश के उन चुनिंदा व्यक्तित्वों को सम्मानित करने के लिए आयोजित किया गया, जिन्होंने समाज, स्वास्थ्य सेवा और राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान दिया है। कार्यक्रम का आयोजन शनिवार, 25 अप्रैल को भारत मंडपम में किया गया, जिसमें देश-विदेश के गणमान्य अतिथि, राजनयिक, उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित लोग उपस्थित रहे। इस अवसर पर डॉ. बसंत गोयल को उनके अद्वितीय योगदान के लिए “विश्व-प्रसिद्ध परोपकारी ब्लड मैन ऑफ इंडिया, मेडिसिन मैन ऑफ इंडिया तथा विश्व की सर्वश्रेष्ठ फार्मेसी” जैसे सम्मानजनक विशेषणों के साथ अलंकृत किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पद्मश्री से सम्मानित प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत ने डॉ. गोयल को सम्मान प्रमाण पत्र प्रदान किया। डॉ. बसंत गोयल ने अपने संबोधन में देशभक्ति, समाज सेवा और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि बताते हुए कहा, “यदि जीवन जीना है तो देश के लिए जीना है, यदि कुछ करना है तो भारत मां के लिए करना है। हमारा पहला कर्तव्य ‘कंट्री फर्स्ट’ होना चाहिए। जातिवाद जैसी संकीर्ण सोच को छोड़कर हमें एकजुट होकर देश के विकास में योगदान देना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि वे पिछले डेढ़ वर्षों से राष्ट्र और गौ सेवा के लिए समर्पित हैं और इस दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने “गौ माता” को राष्ट्रीय माता का दर्जा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय का विशेष महत्व है और यह हमारे आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों से महत्वपूर्ण है। डॉ. गोयल ने युवाओं को संदेश दिया कि वे अपने जीवन की शुरुआत माता-पिता के आशीर्वाद से करें। उन्होंने कहा,“माता-पिता से बड़ा कोई मंदिर नहीं, उनसे बड़ा कोई गुरु नहीं। हमें उनके प्रति सम्मान और प्रेम दिखाना चाहिए, क्योंकि वही हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं।” उन्होंने समाज में बढ़ते साइबर अपराध और नशे की समस्या पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के समय में युवाओं को सही दिशा देना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि नशे की लत तेजी से बढ़ रही है, विशेषकर महानगरों में। इसके लिए उन्होंने सामाजिक संगठनों और संस्थाओं को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डॉ. गोयल ने “काउ थेरेपी” की अवधारणा को भी साझा किया, जिसमें उन्होंने लोगों को गौशालाओं में समय बिताने और गौ सेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, इससे मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में संतुलन प्राप्त होता है। उन्होंने सनातन संस्कृति की व्याख्या करते हुए कहा कि सनातन का अर्थ किसी धर्म विशेष से नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा और मानवता की भावना से है। “सनातन का ना कोई आदि है, ना अंत। जो देश के लिए काम करता है, वही सच्चा सनातनी है,” उन्होंने कहा। अपने संबोधन के अंत में डॉ. गोयल ने सभी पुरस्कार विजेताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे इसी प्रकार देश के प्रति समर्पित रहकर कार्य करते रहें। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक को ‘कंट्री फर्स्ट’ की भावना अपनानी होगी, तभी वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार हो सकेगा। यह उल्लेखनीय है कि डॉ. बसंत गोयल ने अब तक 50 से अधिक देशों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्पेशल गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में भाग लिया है और अपने कार्यों के माध्यम से भारत की प्रतिष्ठा को वैश्विक स्तर पर बढ़ाया है।

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