गाजियाबाद के मुरादनगर थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार देर रात मिल्क रावली गांव के 22 वर्षीय युवक रवि शर्मा की हत्या मुरादनगर थाने के ठीक बाहर गोली मारकर कर दी गई।
रवि शर्मा अपने घर के बाहर हुई फायरिंग की शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचा था। उसे पहले से अंदेशा था कि उसकी जान को खतरा है, इसलिए वह पुलिस की शरण में गया था। लेकिन दुर्भाग्यवश, जिस थाने को वह सबसे सुरक्षित स्थान समझकर पहुँचा था, वहीं उसकी जिंदगी खत्म कर दी गई।
जैसे ही रवि थाने के मुख्य गेट पर खड़ा था, बाइक सवार हमलावर — जिनकी पहचान मोंटी और उसके साथी के रूप में हुई है — मौके पर पहुंचे और रवि पर एक के बाद एक तीन से चार राउंड गोलियां चला दीं। एक गोली सीधा रवि को लगी और वह मौके पर ही ढेर हो गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरी घटना थाने के बाहर हुई, जहां पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन किसी ने न तो जवाबी कार्रवाई की, न ही हमलावरों को पकड़ने की कोशिश की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिसकर्मी केवल मोबाइल से वीडियो बनाते नजर आए।
रवि के परिजनों ने आरोप लगाया है कि आरोपी मोंटी और अजय दिनभर से धमकियां दे रहे थे और उसी दिन शाम को रवि के घर के बाहर फायरिंग भी कर चुके थे। जब रवि सुरक्षा की मांग को लेकर थाने पहुंचा, तो पुलिस ने महज औपचारिकता निभाई और कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
मृतक के भाई ने बताया, “हमने पुलिसकर्मियों को साफ-साफ बताया कि मोंटी वही लड़का है जो फायरिंग कर चुका है, लेकिन पुलिस ने कोई ध्यान नहीं दिया। कुछ ही पलों में उसने मेरे भाई पर गोलियां चला दीं। क्या यही कानून है?”
रवि के पिता ने भी पुलिस की संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए कहा, “112 नंबर पर कॉल की थी, उन्होंने कहा थाने आओ। रवि थाने पहुंचा, तो वहीं उसकी हत्या हो गई। अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। क्या हम थाने में भी सुरक्षित नहीं हैं?”
घटना के बाद पूर्व विधायक अमरपाल शर्मा मौके पर पहुंचे और प्रशासन की नाकामी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा, “अगर थाने के बाहर हत्या हो सकती है, तो फिर आम जनता किस पर भरोसा करे? क्या बुलडोजर केवल फोटो खिंचवाने के लिए रखा है?”
इस हत्याकांड ने न केवल आम लोगों के दिल में भय का माहौल पैदा कर दिया है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में बदमाशों को पुलिस का कोई डर नहीं रह गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस शर्मनाक चूक की जिम्मेदारी कैसे तय करता है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा या नहीं।



