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चुनाव के समय ही मोदी को क्यों याद आती है महिलाओं के खाते में पैसे डालने की बात : भीष्म शर्मा

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भीष्म शर्मा
चुनाव के समय ही मोदी को क्यों याद आती है महिलाओं के खाते में पैसे डालने की बात : भीष्म शर्मा

चुनाव के समय ही मोदी को क्यों याद आती है महिलाओं के खाते में पैसे डालने की बात : भीष्म शर्मा

* वादा कर भूलने की आदत बन चुकी है

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : जब भी किसी राज्य में विधानसभा चुनाव की आहट होती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महिला सम्मान राशि या महिलाओं के नाम पर कोई योजना बना राशी डालने की बात याद आती है | लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद महिलाओं को धोखा दिया जाता है | दिल्ली उसकी सबसे बड़ी मिसाल है | यह कहना है घोंडा के पूर्व विधायक वरिष्ठ कांग्रेस नेता भीष्म शर्मा का | भीष्म शर्मा कहते हैं चुनाव में अपनी सम्भावित हार को देख एक दो बार नहीं बल्कि मोदी जी नें कई राज्यों में यह दावं खेला है और अपनी सम्भावित हार को जीत में बदला है लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ा करती |

दिल्ली में भी बिहार की महिलाएं बड़ी तादाद में रहती है जनके अनेक रिश्तेदार आज भी बिहार में मतदाता है लिहाजा सब मोदी जी की असलियत जानती है चुनाव के चलते भले ही कुछ महिलाओं के खतों में यह राशि पहुंच जायेगी लेकिन वहां भी दिल्ली की तरह यह वादा आधा अधूरा ही रहेगा और उसमे भी ऐसी शर्ते जोड़ दी जायेगीं जिन्हें पूरा करना हर महिला के लिए आसान नहीं होगा |

भीष्म शर्मा ने बिहार में ठीक चुनावों पूर्व महिलाओं को जारी किए गए 10 हजार रूपये की राशि को अलोकतांत्रिक प्रक्रिया बताते हुए इसे सीधे-सीधे इसे वोटरों को प्रलोभन की संज्ञा देते हुए कहा कि सरकार इस राशि को स्वरोजगार के नाम पर जारी करना बता रही है लेकिन क्या 10 हजार की राशि में कोई रोजगार शुरू हो सकता है |

दरअसल बिहार और केंद्र की सरकार जन नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में निकली इंडिया गठबन्धन की वोटर अधिकार यात्रा की लोकप्रियता और जनता के बढ़ते रुझान से घबरा गई है। इस लिए उसको मजबूरन इस तरह के कदम उठाने पड़ रहे हैं। भीष्म शर्मा कहते हैं केंद्र में मोदी जी का यह तीसरा टर्म है और बिहार में भी नितीश कुमार कई पारी खेल चुके है लेकिन इन्होने अभी तक यह योजना क्यों नहीं लागू की ,उन्हें किसने रोका था जबकि बिहार में काफी समय से डबल इंजन की सरकार है | भीष्म शर्मा कहते हैं अपने पूरे कार्यकाल में विकास के कोई काम नहीं करने वाले नेता ही इस तरह के प्रलोभन की बात करते हैं इसी तरह चुनाव से पहले जीएसटी में सुधार का डंका बजाने वालों से पूछना चाहिए आखिर आठ साल तक जनता से हजारों करोड़ टैक्स वसूलने वाले अब किस बात का उत्सव मना रहे हैं | भीष्म शर्मा कहते हैं देश की जनता अब समझ चुकी है जनता अब भाजपा को नकारने का मन बना चुकी है इसलिए भाजपा जनता को खून के आंसू रुलानेके बाद अब घडियाली आंसू बहा रही है | लेकिन जनता अब इनके बहकावे में नहीं आने वाली |

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