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Digital India; “नगद युग की वापसी” : मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया नीति पूरी तरह फेल : जयवीर नागर

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Digital India; “नगद युग की वापसी” : मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया नीति पूरी तरह फेल : जयवीर नागर

नई दिल्ली ( स्पर्श भारद्वाज ) : कांग्रेस नेता एवं एडवोकेट जयवीर नागर, पूर्व अध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश यूथ कांग्रेस ने आज कहा कि केंद्र सरकार की कैशलेस अर्थव्यवस्था और डिजिटल इंडिया का दावा पूरी तरह खोखला साबित हुआ है। देश अब फिर से नगदी की ओर लौट रहा है। श्री नागर ने कहा कि सरकार ने नोटबंदी के समय जनता से वादा किया था कि देश कैशलेस बनेगा। लेकिन आज हकीकत इसके ठीक उलट है। उन्होंने 3 प्रमुख कारण गिनाए कानूनी बाध्यता का अभाव, भारत में कोई भी कानून छोटे और मध्यम दुकानदारों को युपीअई से भुगतान लेने के लिए बाध्य नहीं करता। यूपीआई देना दुकानदार की सुविधा है, मजबूरी नहीं। आयकर अधिनियम की धारा 269SU केवल 50 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले बड़े व्यावसायिक संस्थानों पर ही लागू होती है। इसके उल्लंघन पर धारा 271DB के तहत 5000 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना है। इसका सीधा मतलब है कि यह नियम केवल बड़े मॉल, कॉर्पोरेट घरानों और ई-कॉमर्स कंपनियों पर लागू होता है, आम दुकानदार पर नहीं। श्री नागर बताते हैं रकार एक तरफ डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ 2000 रुपये से ऊपर के मर्चेंट UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है। इसके डर से पहले से ही कई दुकानदार ग्राहकों से UPI पर अतिरिक्त शुल्क मांग रहे हैं या सीधे नकद भुगतान के लिए कह रहे हैं। श्री नागर कहते हैं एक सामान्य व्यापारी युपीअई लेने से बचता है क्योंकि इससे उसकी बिक्री सरकारी रिकॉर्ड में आ जाती है और उसे टैक्स देना पड़ता है। ऊपर से लेनदेन शुल्क का अतिरिक्त बोझ। इसलिए वह सरल रास्ता चुनता है – “नकद दीजिए”। श्री नागर ने कहा, “इसका परिणाम यह होगा कि आम उपभोक्ता को अपनी जेब में नकदी लेकर चलनी पड़ेगी। सरकार की गलत नीतियों के कारण हम 2016 से पहले की स्थिति में वापस जा रहे हैं।” श्री नागर कहते है कांग्रेस पार्टी मांग करती है कि सरकार छोटे व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी युपीअई लेनदेन को हमेशा के लिए शुल्क मुक्त घोषित करे। डिजिटल इंडिया को सफल बनाना है तो व्यापारी पर बोझ डालने के बजाय उसे प्रोत्साहन देना होगा।

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