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महंगाई को कम करने के उपाय नहीं हैं बजट में : विपिन शर्मा

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विपिन शर्मा
महंगाई को कम करने के उपाय नहीं हैं बजट में : विपिन शर्मा

महंगाई को कम करने के उपाय नहीं हैं बजट में : विपिन शर्मा

खास लोगो को लाभ पहुंचाने वाला है बजट

– हर्ष भारद्वाज –

नई दिल्ली ,केंद्र सरकार का बजट एक बार फिर से निराशा लेकर आया है ,बजट में बेरोजगार युवाओं के लिए कोई योजना नहीं है ,लगातार बढती महंगाई पर लगाम लगाने की कोई योजना नहीं है | यह कहना है रोहताश नगर से कांग्रेस के पूर्व विधायक विपिन शर्मा का | विपिन शर्मा कहते हैं भाजपा कहती कुछ है और करती कुछ और है दूसरे शब्दों में हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और | भाजपा सरकार को गरीबों से कुछ लेना देना नहीं है यह सरकार केवल और केवल अपने संगठन के विस्तार और मजबूती के लिए काम करती है |

जिस सरकार की विदेश नीति और आर्थिक नीति से देश को लगातार नुकसान हो रहा है उससे जनता के हित में कोई भी काम करने की क्या उम्मीद की जा सकती है | विपिन शर्मा कहते हैं भाजपा से कोई उम्मीद मत करिए। भाजपा कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए काम करती है। बजट पहले से तय होता है, किसे लाभ पहुंचाना है। ये बजट अदृश्य लोगों को लाभ पहुंचाने वाला है। ये बजट आम लोगों की समझ से बाहर है।

किसान, गरीब, गांव में रहने वालों के समझ से बाहर है। बुनियादी ढांचा क्या है, पैदावार की कीमत क्या दे रहे हैं। मनरेगा जैसी योजना को कमजोर कर दिया गया है। महंगाई को रोकने के लिए उपाय नहीं है। शिक्षा के लिए बेहतर करने के लिए व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य सुविधाएं कितनी बर्बाद हो गई हैं। विपिन शर्मा कहते हैं जननायक राहुल गांधी नें ठीक ही तो कहा है “यह बजट भारत के असली संकटों से आंखें मूंदता दिखता है। युवाओं के पास रोजगार नहीं, विनिर्माण घट रहा है, निवेशक पूंजी निकाल रहे हैं, घरेलू बचत गिर रही है और किसान परेशान हैं। वैश्विक झटकों का खतरा भी बढ़ रहा है, लेकिन सरकार सुधार की दिशा बदलने को तैयार नहीं दिखती और जरूरी चुनौतियों को नजरअंदाज कर रही है।” विपिन शर्मा नें कहा यह बजट आम लोगों के लिए नहीं, बल्कि बड़े कॉरपोरेट के लिए है।

उन्होंने कहा यह बजट पूरी तरह निराशाजनक है। जहां तक दिल्ली का सवाल है दिल्ली के भी भी इस बजट में आई वाश के अलावा कुछ नहीं हैं | विपिन शर्मा कहते हैं विधानसभा चुनावों के दौरान दिल्ली की जनता से जो वायदे किये थे कम से कम उन्हें पूरा करने के इंतजाम तो इस बजट में करने चाहिए थे | बजट को लेकर जो उम्मीदें की गई थीं, उन पर यह पूरी तरह खरा नहीं उतरता। यह पूरी तरह फीका और निराशाजनक रहा।” भले ही सरकार अपनी पीठ खुद थपथपाती रहे लेकिन असलियत यह है बजट से लोगो को घोर निराशा हाथ लगी है |

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