Shubhanshu Shukla Return: 18 दिन बाद पृथ्वी पर लौटे ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, देशभर में खुशी की लहर, भावुक हुए परिजन
भारत के लिए गर्व और भावनाओं से भरा क्षण तब आया जब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से 18 दिन के ऐतिहासिक मिशन के बाद सकुशल पृथ्वी पर लौट आए। जैसे ही उनके लौटने की खबर सामने आई, पूरे देश में उत्साह और गर्व की लहर दौड़ गई। वहीं उनके परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक था — वर्षों की तपस्या, समर्पण और इंतजार आखिरकार रंग लाया।
शुभांशु के पृथ्वी पर लौटते ही उनके माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उनके पिता शंभू दयाल शुक्ला ने भावुक होकर कहा, “हमने रोज़ उनकी सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की… अब हम बस उनसे मिलने के लिए इंतजार नहीं कर पा रहे हैं।” उनकी मां आशा शुक्ला ने नम आंखों से कहा, “मेरे पास अपनी खुशी बयां करने के लिए शब्द नहीं हैं… हमारा बेटा धरती पर सुरक्षित लौट आया, इससे बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को इस ऐतिहासिक सफलता के लिए व्यक्तिगत रूप से बधाई दी। इस पर शुभांशु की बहन शुचि मिश्रा ने कहा, “यह हमारे परिवार के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री जी की बधाई से हमारा उत्साह और बढ़ गया है। शुभांशु पूरी प्रशंसा के हकदार हैं।”
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस विशेष अवसर पर शुभांशु के पिता शंभू दयाल शुक्ला को फोन किया और इस सफलता पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा, “पूरा देश आपके बेटे पर गर्व करता है।” इस बातचीत को लेकर शंभू दयाल शुक्ला ने कहा, “यह हमारे लिए सम्मान की बात है कि देश के रक्षा मंत्री ने हमसे बात की और शुभकामनाएं दीं। हम ईश्वर का आभार मानते हैं कि शुभांशु सुरक्षित वापस लौटे।”
शुभांशु शुक्ला का यह मिशन भारतीय वायुसेना और अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक मील का पत्थर है। वह न सिर्फ एक उत्कृष्ट पायलट हैं, बल्कि अब भारत के उन चुनिंदा लोगों में शामिल हो चुके हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन किया है। उनके इस अद्वितीय अभियान ने भारत की वैश्विक अंतरिक्ष छवि को और मजबूती प्रदान की है।
देशभर से उन्हें बधाई संदेश मिल रहे हैं—चाहे वो आम नागरिक हों या वैज्ञानिक समुदाय, सबने एक सुर में उनकी बहादुरी और समर्पण की सराहना की है। स्कूलों, कॉलेजों और सोशल मीडिया पर उनका स्वागत ‘हीरो’ की तरह किया जा रहा है। उनकी वापसी न सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि यह उस भारतीय जज्बे की भी मिसाल है जो हर चुनौती को पार कर नई ऊंचाइयों को छूने का साहस रखता है।



