Balasore FM College Suicide: यौन उत्पीड़न से टूटकर छात्रा ने किया आत्मदाह, AIIMS भुवनेश्वर में इलाज के दौरान मौत, राष्ट्रपति मुर्मू ने जताया दुख
ओडिशा के बालासोर जिले के फकीर मोहन कॉलेज की एक छात्रा ने लगातार यौन उत्पीड़न और प्रशासनिक लापरवाही से टूटकर आत्मदाह कर लिया। छात्रा करीब 95 प्रतिशत जल गई थी और बीते कई दिनों से AIIMS भुवनेश्वर के बर्न सेंटर में जिंदगी की जंग लड़ रही थी। लेकिन तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद वह मौत से हार गई और 14 जुलाई की रात 11:46 बजे उसने अंतिम सांस ली।
इस हृदयविदारक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। छात्रा, जो बीएड इंटीग्रेटेड द्वितीय वर्ष की थी, ने 12 जुलाई को कॉलेज के गेट के सामने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह कर लिया। यह कदम उसने तब उठाया जब उसकी यौन उत्पीड़न की शिकायत पर कॉलेज प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। छात्रा का आरोप था कि बीएड विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर समीर कुमार साहू ने उसका यौन शोषण किया, और उसने कई बार इसकी शिकायत की, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।
30 जून को छात्रा की ओर से पहली बार शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन 12 दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जब पीड़िता ने खुद को आग लगाई, तब जाकर प्रशासन और पुलिस हरकत में आई। घटना के अगले ही दिन आरोपी प्रोफेसर समीर साहू को गिरफ्तार किया गया, और इसके दो दिन बाद कॉलेज के प्रिंसिपल दिलीप कुमार घोष को भी हिरासत में ले लिया गया। दोनों को उच्च शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
छात्रा को गंभीर हालत में AIIMS भुवनेश्वर ले जाया गया, जहां उसे गुर्दे की रिप्लेसमेंट थेरेपी समेत कई उन्नत चिकित्सकीय उपचार दिए गए। डॉक्टरों ने तीन दिनों तक छात्रा को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसके शरीर में अत्यधिक जलन और अंगों के काम करना बंद कर देने के कारण उसकी स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
इस पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वयं AIIMS भुवनेश्वर का दौरा किया। उन्होंने बर्न यूनिट में जाकर छात्रा के परिजनों से मुलाकात की और उनके साथ संवेदना व्यक्त की। उन्होंने इलाज कर रहे डॉक्टरों की टीम से बातचीत की और छात्रा की हालत की जानकारी ली। राष्ट्रपति ने इस घटना पर गहरा दुख जताया और आश्वासन दिया कि मामले में न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
छात्रा द्वारा आत्मदाह से पहले कॉलेज परिसर में धरना देना, बार-बार शिकायत करना और प्रशासन का उदासीन रवैया, यह सब प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बन गया है। राज्य सरकार की ओर से उच्च शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि कॉलेज प्रशासन मामले को ठीक से संभालने और छात्रा को न्याय दिलाने में विफल रहा, जिससे यह दर्दनाक स्थिति पैदा हुई।
अब यह मामला केवल यौन उत्पीड़न का नहीं रहा, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा, कॉलेज प्रशासन की जिम्मेदारी और न्यायिक प्रक्रिया की तत्परता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। देशभर में छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश जताया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।



