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Saina Nehwal Retirement: बैडमिंटन की स्वर्णिम शटल थमी, साइना नेहवाल ने चोट के चलते पेशेवर खेल से लिया संन्यास

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Saina Nehwal Retirement: बैडमिंटन की स्वर्णिम शटल थमी, साइना नेहवाल ने चोट के चलते पेशेवर खेल से लिया संन्यास

भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज खिलाड़ी और पूर्व विश्व नंबर एक साइना नेहवाल ने आधिकारिक तौर पर पेशेवर खेल से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले के साथ ही भारतीय खेल इतिहास का एक सुनहरा अध्याय समाप्त हो गया है। सोमवार को सामने आई इस घोषणा में साइना ने साफ किया कि लंबे समय से चली आ रही घुटनों की गंभीर समस्या और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं ने उन्हें यह कठिन फैसला लेने के लिए मजबूर किया। साइना ने बताया कि उनके घुटनों का कार्टिलेज पूरी तरह खराब हो चुका है और वह अर्थराइटिस जैसी समस्या से जूझ रही हैं, जिसके चलते उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा में बने रहना अब संभव नहीं रह गया था।

उन्होंने कहा कि विश्व स्तरीय बैडमिंटन खेलने के लिए रोजाना 8 से 9 घंटे की कड़ी ट्रेनिंग जरूरी होती है, लेकिन उनकी हालत यह थी कि महज एक या दो घंटे की ट्रेनिंग के बाद ही घुटनों में सूजन और तेज दर्द शुरू हो जाता था। साइना ने अपने माता-पिता और कोच से यह बात साफ कर दी थी कि अब शरीर उनका साथ नहीं दे पा रहा है और करियर को आगे खींचना मुश्किल हो गया है। गौरतलब है कि साइना ने पिछले दो वर्षों से किसी भी पेशेवर टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया था और उनका आखिरी मुकाबला 2023 में सिंगापुर ओपन के दौरान खेला गया था। संन्यास की औपचारिक घोषणा में हुई देरी को लेकर उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने दम पर की थी और उसका अंत भी अपनी शर्तों पर करना चाहती थीं, इसलिए उन्हें इसकी बड़ी घोषणा करने की जरूरत महसूस नहीं हुई।

उनके अनुसार, समय के साथ लोगों को यह समझ आ जाना था कि वह अब कोर्ट पर नजर नहीं आएंगी। साइना के करियर में 2016 के रियो ओलंपिक के दौरान लगी घुटने की चोट एक अहम मोड़ साबित हुई, जिसने उनकी लय को प्रभावित किया, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। 2017 की विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना और 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक अपने नाम करना उनके जुझारू जज्बे का प्रमाण रहा। हालांकि, बार-बार उभरने वाली घुटनों की समस्या ने अंततः उनके शानदार करियर पर विराम लगा दिया। साइना नेहवाल का सफर न केवल उपलब्धियों से भरा रहा बल्कि उन्होंने लाखों युवाओं, खासकर लड़कियों को खेल के मैदान में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उनका नाम भारतीय खेल इतिहास में हमेशा सम्मान और गर्व के साथ लिया जाएगा।

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