Ram Mandir CEO: पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बने राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO, बोले- इतिहास से सीखकर पूरी ईमानदारी से करूंगा काम
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर ट्रस्ट का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। ट्रस्ट ने बुधवार, 2 सितंबर को उनकी नियुक्ति की घोषणा की। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद जितेंद्र मिश्र ने चयन समिति, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भगवान श्रीराम के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह इतिहास से सीख लेते हुए पूरी लगन और ईमानदारी के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास करेंगे।
भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्षों तक सेवा दे चुके जितेंद्र मिश्र ने अपने सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। वह पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व भी कर चुके हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अब सैन्य सेवा के लंबे अनुभव के बाद उन्हें अयोध्या के राम मंदिर से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की जिम्मेदारी मिलने के बाद जितेंद्र मिश्र ने कहा कि इस अवसर पर वह खुद को बेहद भाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नियुक्ति की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपनी खुशी सबसे पहले अपनी मां और परिवार के साथ साझा की।
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में जितेंद्र मिश्र ने कहा कि उनके लिए यह जिम्मेदारी केवल एक प्रशासनिक पद नहीं है, बल्कि भगवान श्रीराम की सेवा का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने उन पर जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरने के लिए वह पूरी क्षमता के साथ काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों के साथ बातचीत के बाद आगे की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी। मंदिर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए टीम के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
जितेंद्र मिश्र ने कहा कि ट्रस्ट की प्राथमिकताओं को समझना उनकी शुरुआती जिम्मेदारियों में शामिल होगा। इसके बाद उन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि टीमवर्क के जरिए मंदिर से संबंधित व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “राम मंदिर ट्रस्ट के विश्वास और टीम के साथ मिलकर मैं राम मंदिर के लिए बेहतर से बेहतर काम करने की कोशिश करूंगा।” उनका कहना है कि किसी भी संस्था में बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए टीम के साथ समन्वय बेहद जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर से लेकर राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की जिम्मेदारी मिलने तक के अपने सफर के बारे में बात करते हुए जितेंद्र मिश्र भावुक भी नजर आए। उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी को भगवान श्रीराम की इच्छा से जोड़ते हुए कहा कि उनके जीवन में जो कुछ भी हुआ है, वह प्रभु की कृपा से संभव हुआ है।
जितेंद्र मिश्र ने कहा कि प्रभु श्रीराम की इच्छा के बिना वह कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि ईश्वर जैसा आदेश देंगे, उसी के अनुरूप वह अपने दायित्वों का निर्वहन करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने भगवान से इस नई जिम्मेदारी को निभाने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की।
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित चोरी के सवाल पर भी जितेंद्र मिश्र ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई भी काम करने से पहले इतिहास से सीख लेना जरूरी होता है। उनका कहना था कि वह पिछली घटनाओं और अनुभवों से सीख लेते हुए आगे काम करेंगे।
उन्होंने किसी खास घटना पर विस्तृत टिप्पणी करने के बजाय अपनी भावी कार्यशैली को लेकर कहा कि इतिहास से सीखना महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि उन्हें इस दायित्व को बेहतर तरीके से निभाने की शक्ति मिले।
जितेंद्र मिश्र का भारतीय वायुसेना में लंबा और महत्वपूर्ण करियर रहा है। वह 6 दिसंबर 1986 को फाइटर पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने करीब चार दशकों तक वायुसेना में अलग-अलग परिचालन और नेतृत्वकारी जिम्मेदारियां संभालीं।
अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान पूरी की। उन्हें अलग-अलग प्रकार के सैन्य विमानों और हेलिकॉप्टरों को उड़ाने का व्यापक अनुभव है।
जितेंद्र मिश्र ने 18 से अधिक प्रकार के फाइटर एयरक्राफ्ट, ट्रांसपोर्ट विमान और हेलिकॉप्टर उड़ाए हैं। इस अनुभव के कारण उनकी गिनती भारतीय वायुसेना के बेहद अनुभवी पायलटों और वरिष्ठ अधिकारियों में की जाती रही है।
वह फाइटर कॉम्बैट लीडर के साथ एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रहे हैं। टेस्ट पायलट की भूमिका में विमान की क्षमता और अलग-अलग उड़ान परिस्थितियों का आकलन करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल होती हैं।
जितेंद्र मिश्र ने देश और विदेश के प्रतिष्ठित सैन्य संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी और एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से भी प्रशिक्षण हासिल किया है।
अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने पश्चिमी वायु कमान की कमान भी संभाली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व करने के बाद अब उनका सफर अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक जिम्मेदारी तक पहुंचा है।
राम मंदिर से जुड़े कार्यों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को देखते हुए CEO का पद महत्वपूर्ण माना जाता है। मंदिर परिसर की प्रशासनिक व्यवस्था, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और ट्रस्ट की प्राथमिकताओं को धरातल पर लागू करने में CEO की अहम भूमिका रहती है।
जितेंद्र मिश्र ने फिलहाल साफ किया है कि वह ट्रस्ट के साथ बातचीत करके प्राथमिकताओं को समझेंगे और उसके बाद आगे की दिशा तय करेंगे। उनका जोर टीम के साथ मिलकर काम करने और पुराने अनुभवों से सीख लेते हुए व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर रहेगा।
भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्षों की सेवा और महत्वपूर्ण कमांड अनुभव के बाद अब जितेंद्र मिश्र के सामने एक अलग तरह की जिम्मेदारी होगी। नई भूमिका संभालने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह ट्रस्ट के विश्वास को कायम रखते हुए पूरी लगन और ईमानदारी के साथ काम करने का प्रयास करेंगे।



