AIIMS Tanvi Death Case: 15 साल की तन्वी की मौत पर AIIMS का बड़ा एक्शन, क्लीनिकल जांच के लिए कमेटी गठित
नई दिल्ली। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने 15 वर्षीय तन्वी की मौत और उसके इलाज को लेकर उठ रहे सवालों की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है। जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित तन्वी लंबे समय से एम्स की देखरेख में थी और 1 सितंबर को उसकी मौत हो गई। परिवार की ओर से उसकी हार्ट सर्जरी में कथित देरी के आरोप लगाए जाने और मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आने के बाद संस्थान ने पूरे क्लीनिकल घटनाक्रम की समीक्षा कराने का फैसला किया है।
तन्वी के माता-पिता का आरोप है कि उनकी बेटी की सर्जरी लंबे समय तक टलती रही। परिवार की ओर से इलाज और सर्जरी को लेकर बनाए गए वीडियो संदेश सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आया। इसके बाद एम्स में गंभीर हृदय रोगियों के इलाज, सर्जरी के इंतजार और जटिल मामलों के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठने लगे।
एम्स ने 2 सितंबर को इस मामले को लेकर बयान जारी कर तन्वी के इलाज से संबंधित अपना पक्ष रखा। संस्थान के मुताबिक, तन्वी पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को एम्स की कार्डियोलॉजी OPD में जांच के लिए आई थी। उस समय वह बेहद कम उम्र की थी और जांच के दौरान उसे गंभीर जन्मजात हृदय रोग का पता चला था।
एम्स के अनुसार, तन्वी को वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD) के साथ पल्मोनरी एट्रेसिया की समस्या थी। यह हृदय से जुड़ी एक जटिल जन्मजात स्थिति है। इसमें हृदय से फेफड़ों तक रक्त पहुंचने का सामान्य रास्ता विकसित नहीं होता या गंभीर रूप से बाधित होता है।
बीमारी की गंभीरता को देखते हुए तन्वी को कार्डियक सर्जरी टीम के पास भेजा गया था। इसका उद्देश्य यह पता लगाना था कि उसके हृदय की संरचना को सर्जरी के जरिए ठीक किया जा सकता है या नहीं। इसके बाद उसकी बीमारी और हृदय की बनावट को समझने के लिए अलग-अलग स्तर पर जांच की गई।
एम्स के मुताबिक, वर्ष 2013 के दौरान तन्वी की CT एंजियोग्राफी, पारंपरिक एंजियोग्राफी और कार्डियक कैथीटेराइजेशन समेत कई जांचें की गईं। इन जांचों के जरिए डॉक्टरों ने हृदय और उससे जुड़ी रक्त वाहिकाओं की संरचना का आकलन किया।
इन जांचों का उद्देश्य यह तय करना था कि तन्वी की बीमारी में सर्जिकल उपचार संभव और सुरक्षित है या नहीं। मामला जटिल होने के कारण उसका लगातार विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन किया जाता रहा।
एम्स का कहना है कि वर्ष 2017 में इलाज कर रही टीम ने उपलब्ध जांच और हृदय की संरचना का मूल्यांकन करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला था कि बीमारी की जटिलता के कारण सर्जरी करना संभव नहीं है। इसके बाद तन्वी को मेडिकल मैनेजमेंट के साथ नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई।
संस्थान के अनुसार, सर्जरी नहीं किए जाने के बावजूद तन्वी का मामला मेडिकल समीक्षा के दायरे में बना रहा। परिवार भी लगातार संस्थान के संपर्क में रहा और बेटी के लिए सर्जरी की संभावना को लेकर चिकित्सकीय सलाह लेता रहा।
मिली जानकारी के अनुसार, परिवार ने अन्य विशेषज्ञों से भी राय ली थी। पिछले वर्ष एम्स के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के तत्कालीन प्रमुख से भी मामले पर सलाह ली गई थी। उन्होंने मेडिकल मैनेजमेंट जारी रखने की सलाह दी थी।
परिवार ने एक अन्य वरिष्ठ कार्डियोथोरेसिक सर्जन से भी तन्वी की स्थिति को लेकर राय ली। जानकारी के मुताबिक, वहां से भी सर्जरी नहीं करने की सलाह दी गई थी। हालांकि, परिवार की ओर से अब आरोप लगाया गया है कि उनकी बेटी की सर्जरी लंबे समय तक टलती रही।
तन्वी की तबीयत अगस्त 2026 में गंभीर रूप से बिगड़ गई। इसके बाद 24 अगस्त को उसे दोबारा एम्स लाया गया। डॉक्टरों ने उसकी स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन किया और बीमारी की गंभीरता को देखते हुए आगे उपलब्ध उपचार विकल्पों पर विचार किया।
एम्स के मुताबिक, इस दौरान हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट की संभावना पर भी विचार किया गया। तन्वी की हृदय संबंधी बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी थी, इसलिए डॉक्टरों के सामने इलाज के विकल्प बेहद जटिल थे।
इलाज के बीच 1 सितंबर की सुबह तन्वी की मौत हो गई। किशोरी की मौत के बाद परिवार की ओर से सर्जरी में कथित देरी को लेकर लगाए गए आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया। सोशल मीडिया पर परिवार के वीडियो सामने आने के बाद एम्स की ओर से क्लीनिकल जांच कराने का निर्णय लिया गया।
एम्स द्वारा गठित कमेटी तन्वी के इलाज से जुड़े पूरे घटनाक्रम की समीक्षा करेगी। इसमें उसके पुराने क्लीनिकल रिकॉर्ड, अलग-अलग समय पर हुई जांचों, डॉक्टरों द्वारा दिए गए उपचार, विशेषज्ञों की राय और इलाज से जुड़े फैसलों को देखा जाएगा।
कमेटी इस बात की भी समीक्षा करेगी कि तन्वी के मामले में अलग-अलग समय पर सर्जरी को लेकर क्या चिकित्सकीय राय दी गई थी और उन फैसलों के पीछे क्या मेडिकल कारण थे। परिवार द्वारा सर्जरी में देरी के लगाए गए आरोपों के मद्देनजर यह पहलू जांच में महत्वपूर्ण रहेगा।
तन्वी की मौत से जुड़ी परिस्थितियों को समझने के लिए पोस्टमार्टम भी कराया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उसे क्लीनिकल रिकॉर्ड और अन्य मेडिकल दस्तावेजों के साथ देखा जा सकता है।
एम्स ने फिलहाल तन्वी की मौत के कारणों या परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है। संस्थान का कहना है कि कमेटी की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मामले की परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों और एम्स की ओर से जारी मेडिकल विवरण के बीच अब जांच कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि तन्वी के करीब 14 वर्षों के इलाज के दौरान कौन-कौन से चिकित्सकीय फैसले लिए गए और सर्जरी नहीं किए जाने के पीछे क्या कारण थे।
फिलहाल AIIMS ने पूरे मामले की क्लीनिकल जांच शुरू करने के लिए कमेटी गठित कर दी है। कमेटी तन्वी के मेडिकल रिकॉर्ड से लेकर विशेषज्ञों की राय और अंतिम दिनों में दिए गए इलाज तक की समीक्षा करेगी। संस्थान ने कहा है कि जांच पूरी होने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने से पहले तन्वी की मौत की परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।



