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Chandranath Rath Murder: शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या की साजिश में असिस्टेंट सागर सोनकर पर आरोप, CBI चार्जशीट में 12 नाम

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Chandranath Rath Murder: शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या की साजिश में असिस्टेंट सागर सोनकर पर आरोप, CBI चार्जशीट में 12 नाम

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में बड़ा खुलासा सामने आया है। जांच एजेंसी की चार्जशीट के मुताबिक, चंद्रनाथ रथ की हत्या अचानक हुई वारदात नहीं बल्कि कथित तौर पर छह महीने से ज्यादा समय तक रची गई साजिश का नतीजा थी। CBI ने रथ के 29 वर्षीय असिस्टेंट सागर सोनकर को इस कथित साजिश का प्रमुख किरदार बताया है।

CBI ने इस मामले में 7 अगस्त को बारासात स्थित एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में कुल 12 आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें से कृष्ण कुमार सिंह को छोड़कर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कृष्ण कुमार सिंह बिहार का रहने वाला बताया गया है और उसकी तलाश जारी है।

चंद्रनाथ रथ की 6 मई को रात करीब 10 बजे कोलकाता के मध्यमग्राम इलाके में उनकी गाड़ी के अंदर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हमले में उनके साथ मौजूद बुद्धदेव बेरा भी घायल हो गए थे। वारदात के बाद मामले की जांच में कई स्तर पर डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला गया।

CBI की जांच में iCloud पर मिली एक तस्वीर, CCTV फुटेज, रोड टोल रिकॉर्ड और कई मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों को महत्वपूर्ण बताया गया है। जांच के दौरान एक मोबाइल फोन हुगली नदी के नीचे से भी बरामद किए जाने की बात सामने आई है। एजेंसी ने इन अलग-अलग साक्ष्यों की कड़ियां जोड़कर कथित साजिश का घटनाक्रम तैयार किया।

चार्जशीट में सागर सोनकर और उसके भाई साहेब सोनकर के अलावा विकास मिश्रा, विनय राय, संजय राय, ज्ञानेंद्र सिंह, राज कुमार सिंह, गोलू सिंह, नवीन कुमार सिंह, मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य समेत अन्य आरोपियों के नाम शामिल हैं। इनमें कई आरोपी उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले बताए गए हैं।

CBI ने मामले में बड़ी संख्या में गवाहों को भी सूचीबद्ध किया है। चार्जशीट में 585 लोगों के नाम गवाह के रूप में शामिल किए गए हैं। जांच एजेंसी इन गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड के आधार पर कथित हत्या की साजिश को साबित करने का प्रयास कर रही है।

सागर सोनकर और उसके 20 वर्षीय भाई साहेब सोनकर को 31 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले CBI ने कथित चार शार्पशूटरों समेत 11 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। जांच आगे बढ़ने के बाद दोनों भाइयों की कथित भूमिका सामने आने का दावा किया गया।

सागर और साहेब के परिवार ने हालांकि उन पर लगे आरोपों पर सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना था कि दोनों चंद्रनाथ रथ के बेहद करीब थे और उनके साथ काम करते थे। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के पर्सनल ऑफिस में भी काम किया था और चुनाव के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

परिवार के एक रिश्तेदार के मुताबिक, सागर चंद्रनाथ रथ के बेहद करीबी सहयोगियों में शामिल था। वह उनके वित्तीय लेनदेन और भुगतान से जुड़े काम भी संभालता था। बाद में सागर अपने भाई साहेब को भी साथ लेकर आया और चंद्रनाथ रथ ने उसे भी काम पर रख लिया था।

CBI की जांच में हालांकि हत्या के पीछे अलग कहानी सामने आने का दावा किया गया है। एजेंसी के मुताबिक, सागर कथित तौर पर चंद्रनाथ रथ से नाराज हो गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि सागर खुद को रथ के बराबर समझता था और कथित तौर पर मानता था कि उन्हें रास्ते से हटाकर वह शुभेंदु अधिकारी के और करीब पहुंच सकता है।

CBI का आरोप है कि हत्या की कथित साजिश की तैयारियां नवंबर 2025 के आसपास शुरू हो गई थीं। जांच में दावा किया गया है कि सागर ने अपने भाई साहेब को दूसरे लोगों के नाम पर मोबाइल फोन और SIM कार्ड खरीदने के काम में शामिल किया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इसके बाद सागर ने अपने स्कूल के दोस्त विकास मिश्रा से संपर्क किया। विकास मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के सलेमपुर का रहने वाला बताया गया है। विकास की पहचान विनय राय से थी और इसी संपर्क के माध्यम से कथित तौर पर आगे का नेटवर्क तैयार किया गया।

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CBI का दावा है कि WhatsApp कॉल रिकॉर्ड में सागर और विकास मिश्रा के बीच लगातार संपर्क के साक्ष्य मिले हैं। जांच के मुताबिक, दोनों 20 जनवरी 2026 से नियमित रूप से बातचीत कर रहे थे। एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान कथित कॉन्ट्रैक्ट किलर की व्यवस्था करने की योजना बनाई गई।

जांच में सामने आया कि 30 जनवरी को विकास मिश्रा ने कथित तौर पर विनय राय को WhatsApp कॉल किया था। CBI के मुताबिक, विनय राय का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उसके खिलाफ हत्या समेत पांच आपराधिक मामले दर्ज या लंबित बताए गए हैं।

CBI का कहना है कि इसके बाद सागर, विकास मिश्रा और विनय राय के बीच लगातार संपर्क बना रहा। कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी इन लोगों के बीच कथित साजिश की कड़ियां जोड़ने का दावा कर रही है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, 6 फरवरी को विनय राय ने कथित तौर पर शूटरों की व्यवस्था करने के लिए अपने परिचित संजय राय से संपर्क किया। उस समय संजय राय सूरत में था और उसे तत्काल धनबाद पहुंचने के लिए कहा गया।

CBI का दावा है कि संजय राय के धनबाद पहुंचने के बाद विकास मिश्रा ने सागर, विनय राय और संजय के बीच मुलाकात की व्यवस्था की। आरोप है कि इसी बैठक में चंद्रनाथ रथ की हत्या को अंजाम देने के संभावित तरीकों पर चर्चा की गई।

जांचकर्ताओं के मुताबिक, कथित साजिश आगे बढ़ने के साथ धनबाद, कोलकाता, बलिया और गाजीपुर समेत कई शहरों के बीच आरोपियों की आवाजाही हुई। CBI ने यात्रा रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के जरिए इन यात्राओं की कड़ियां जोड़ने का दावा किया है।

सागर से मुलाकात के कुछ समय बाद संजय राय कथित तौर पर कोलकाता पहुंचा और एक होटल में रुका। इस होटल का मालिक पंकज सिंह बताया गया है। CBI का दावा है कि होटल में संजय के रहने और बाद में साल्ट लेक में उसके ठहरने का खर्च सागर ने उठाया था।

CBI की चार्जशीट के मुताबिक, 18 फरवरी को सागर कथित तौर पर संजय राय को अपने साथ लेकर मध्यमग्राम गया। आरोप है कि इस दौरान चंद्रनाथ रथ के कार्यालय और उनसे जुड़े संभावित स्थानों की रेकी की गई।

एजेंसी का दावा है कि विधानसभा और हाई कोर्ट से जुड़े इलाकों की भी रेकी की गई थी। जांच में एक Uber ड्राइवर का बयान भी महत्वपूर्ण बताया गया है, जिसने कथित तौर पर सागर और संजय राय की पहचान की।

CBI के मुताबिक, 18 फरवरी की रेकी के बाद संजय राय उसी दिन धनबाद वापस चला गया था। हालांकि जांच में दावा किया गया है कि वह मार्च और अप्रैल के दौरान दोबारा कोलकाता आया और कथित तौर पर आगे की रेकी तथा तैयारियों में शामिल रहा।

जांच एजेंसी ने CCTV फुटेज, मोबाइल फोन रिकॉर्ड, WhatsApp कॉल, टोल रिकॉर्ड, होटल में ठहरने से जुड़े दस्तावेज और आरोपियों की यात्राओं को एक-दूसरे से जोड़कर कथित साजिश की टाइमलाइन तैयार की है। iCloud से मिले डिजिटल साक्ष्य को भी इस मामले की अहम कड़ी बताया गया है।

CBI अब अदालत में इन्हीं डिजिटल, तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका साबित करने का प्रयास करेगी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा और आरोपियों पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

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