PM Modi Iran Call: मध्य पूर्व संकट पर प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच 45 मिनट की बातचीत, तनाव घटाने की अपील
इज़राइल-ईरान टकराव के बीच अमेरिका के हमलों से उपजे गंभीर हालात पर भारत ने भी अपनी चिंता स्पष्ट कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से टेलीफोन पर बातचीत कर मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता की अपील करते हुए बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आग्रह किया।
बातचीत ऐसे समय में हुई है जब इज़राइल-ईरान संघर्ष अपने दसवें दिन में प्रवेश कर चुका है और अमेरिका ने ईरान की परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाकर इस टकराव को और गंभीर बना दिया है। इस पृष्ठभूमि में ईरानी राष्ट्रपति की पहल पर हुई यह बातचीत करीब 45 मिनट चली, जिसमें दोनों नेताओं ने स्थिति की गंभीरता पर विस्तार से चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “ईरान के राष्ट्रपति से बात की। हमने मौजूदा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। हालिया तनाव को लेकर गहरी चिंता जताई और क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए तत्काल तनाव कम करने, संवाद और कूटनीति की अपील दोहराई।”
सूत्रों के अनुसार, यह फोन कॉल ईरानी राष्ट्रपति द्वारा किया गया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिकी हमले के बाद क्षेत्र की जमीनी स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने भारत को शांति, सुरक्षा और स्थिरता में योगदान देने वाला एक अहम मित्र और साझेदार बताया।
राष्ट्रपति पेजेशकियन ने विशेष रूप से भारत से यह आग्रह किया कि वह एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए संघर्ष कम करने में सहयोग दे। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की भूमिका ऐतिहासिक रूप से संतुलित रही है और मध्य पूर्व में शांति प्रयासों को समर्थन देने में भारत को अहम माना जाता है।
भारत की ओर से यह रुख साफ संकेत देता है कि नई दिल्ली इस संघर्ष का सैन्य समाधान नहीं देखती और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा बातचीत के जरिए समाधान खोजने की अपील करती है। भारत ने पहले भी यमन युद्ध, इराक संकट और अफगान शांति प्रक्रिया जैसे मामलों में संतुलित कूटनीति अपनाई है और एक बार फिर उसी भूमिका की ओर संकेत किया है।
इस बातचीत को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर डालना शुरू कर दिया है। भारत, जो ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है, इस अस्थिरता को लेकर गंभीर है।


