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Parliament Bill 2026: संसद में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी, महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पेश होंगे

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Parliament Bill 2026: संसद में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी, महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पेश होंगे

संसद का विस्तारित सत्र आज से एक बड़े राजनीतिक और संवैधानिक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है, जहां केंद्र सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के पुनर्गठन से जुड़े अहम विधेयक पेश करने जा रही है। इस कदम को देश की संसदीय व्यवस्था में अब तक के सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा है।

सरकार की ओर से संसद में संविधान (131वां) संशोधन विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है, जिसके तहत लोकसभा और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल है। इस प्रस्ताव में महिला आरक्षण का प्रावधान भी इसी व्यापक ढांचे का हिस्सा होगा, जिसे लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय माना जाता रहा है।

इसके साथ ही परिसीमन से जुड़ा विधेयक और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक भी सदन में पेश किए जाने की संभावना है। सरकार का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

हालांकि इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव भी तेज हो गया है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने परिसीमन प्रस्ताव का विरोध करने का संकेत दिया है। विपक्ष का मानना है कि यह बदलाव क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है, खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों में सीटों के संभावित बदलाव को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं।

दक्षिणी राज्यों को आशंका है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण उन्हें लोकसभा सीटों के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि सरकार ने इन सभी आशंकाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी राज्य की सीटों में कटौती नहीं की जाएगी और किसी प्रकार का क्षेत्रीय अन्याय नहीं होगा।

सरकार के अनुसार प्रस्तावित योजना के तहत लोकसभा की अधिकतम सीटों की सीमा 850 तय की गई है, जिसमें सभी राज्यों में समान रूप से लगभग 50 प्रतिशत तक सीटों की बढ़ोतरी की संभावना है। सरकार का कहना है कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों के पुनर्गठन की प्रक्रिया नहीं हुई है, इसलिए अब यह बदलाव आवश्यक हो गया है।

परिसीमन की प्रक्रिया नवीनतम उपलब्ध जनगणना (2011) के आधार पर की जाएगी और इसके लिए हर राज्य में परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा। यह आयोग सभी राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों से चर्चा कर अंतिम निर्णय लेगा।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विधेयक संसद में तीखी बहस और टकराव की स्थिति पैदा कर सकता है, क्योंकि यह सीधे देश की राजनीतिक संरचना और सत्ता संतुलन को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम है।

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