NIA Arrest ISIS: आईएसआईएस के पुणे स्लीपर सेल का मास्टरमाइंड रिजवान अली लखनऊ से गिरफ्तार, एनआईए को मिली बड़ी कामयाबी
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आतंकवाद के खिलाफ अपने अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल की है। शुक्रवार को एजेंसी ने आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) से जुड़े पुणे स्लीपर सेल मॉड्यूल के मुख्य साजिशकर्ता रिजवान अली उर्फ अबू सलमा उर्फ मौला को लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसकी तलाश में सुरक्षा एजेंसियां कई महीनों से जुटी हुई थीं।
रिजवान अली की गिरफ्तारी के लिए पहले ही तीन लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। साथ ही, उसके खिलाफ एक स्थायी गैर-जमानती वारंट (NBW) भी जारी किया गया था। एनआईए की जांच में सामने आया है कि रिजवान ISIS की भारत विरोधी साजिशों का हिस्सा था और वह देश में आतंक फैलाने के लिए कई स्थानों की रेकी कर रहा था। जिन स्थानों की उसने टोह ली थी, उन्हें संभावित आतंकी ठिकानों के रूप में इस्तेमाल किया जाना था।
जांच एजेंसी के मुताबिक, रिजवान सिर्फ योजना बनाने तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह बंदूक चलाने और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बनाने की ट्रेनिंग देने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा था। वह आतंकवादी हमलों के लिए युवाओं की भर्ती और उन्हें कट्टरपंथी बनाने की गतिविधियों में लिप्त था।
एनआईए के अनुसार, यह गिरफ्तारी पुणे में हथियार और विस्फोटक जब्ती मामले में की गई है। इससे पहले इस मॉड्यूल से जुड़े 10 अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद यूनुस साकी, अब्दुल कादिर पठान, सिमाब नसीरुद्दीन काजी, जुल्फिकार अली बड़ौदावाला, शमिल नाचन, आकिफ नाचन, शाहनवाज आलम, अब्दुल्ला फैयाज शेख और तलहा खान के नाम शामिल हैं।
इन सभी के खिलाफ एनआईए ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किए हैं। एजेंसी का दावा है कि इन लोगों ने भारत में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने, सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने और इस्लामी शासन लागू करने के लिए कई आतंकी घटनाओं की साजिश रची थी।
एनआईए का यह भी कहना है कि संगठन ISIS भारत में हिंसा के जरिए इस्लामी शासन स्थापित करने की साजिशें रच रहा था, जिसे नाकाम करने के लिए एजेंसी ने हर स्तर पर जांच तेज कर दी है।
गिरफ्तारी के बाद रिजवान अली को दिल्ली लाया गया और उसे अदालत में पेश कर 18 जुलाई तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया गया है। एनआईए अब उससे पूछताछ कर अन्य फरार आरोपियों और नेटवर्क के विस्तार की जानकारी जुटाने में लगी है।
यह गिरफ्तारी न सिर्फ पुणे ISIS केस में एक अहम मोड़ है, बल्कि यह भी संकेत है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियां आतंकी गतिविधियों के खिलाफ पूरी तरह सतर्क हैं और देश में अस्थिरता फैलाने की किसी भी साजिश को सफल नहीं होने देंगी।



