नीलकमल प्रकाशन, हैदराबाद ने विश्व पुस्तक मेले – 2026 में डॉ भारद्वाज, के. एस. की दो पुस्तकें पेश की
– हर्ष भारद्वाज –
नई दिल्ली , ह्यूमर इन क्लासरूम में बाल मनोविज्ञान के शोधकर्ताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया है कि सफल शिक्षकों के गुणों में हास्य युक्त प्रवृति को प्रमुख रूप से असरदार पाया है. उनका कहना है कि जो शिक्षक हास्य का संदर्भानुसार प्रयोग करते हैं, छात्रों को वे अधिक प्रिय और स्वीकार्य होते हैं. वास्तव में, अध्यापन ही एकमात्र व्यवसाय है जिसे हास्य भावना की सबसे अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि शिक्षकों को छोटे छोटे बच्चों की व विकासशील बालकों की देखभाल, उनके मनोवैज्ञानिक विकास एवं शैक्षिक प्रगति को निश्चित करना होता है.
विद्यालय एवं कक्षा में शिक्षक ही वह अपरिहार्य व अत्यावश्यक इकाई हैं जो अनजाने में ही सही बच्चों और कक्षा के परिवेश पर अपने व्यक्तित्व की गहरी छाप छोड़ते हैं | विद्यालय में विकसित, पुष्पित एवं प्रस्फुटित होती हुई बालरुपी कलियाँ शिक्षक की प्रकृति एवं व्यक्तित्व से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकती. हास्य भावनाहीन शिक्षक बालकों को कभी अच्छे नहीं लगते और ऐसे शिक्षकों से अपनत्व करना तो दूर, वे उनसे दूर दूर रहने की कोशिश करते है. बालकों की यह राय शिक्षकों को महंगी पड़ती है |

एक बालक विद्यालय में पहला दिन गुजार कर घर लौटा तो दादी ने पूछा, “कहो बेटा. विद्यालय कैसा लगा? बच्चा बोला, “दादी, सब ठीक था, मगर एक सबसे बड़ा लड़का बहुत बकबक कर रहा था. सारा मज़ा किरकिरा कर दिया.” दादी खिलखिला कर हँस पड़ी. ह्यूमर इन क्लासरूम सलाह देती है कि शिक्षकों को खुशमिजाज़ होना चाहिए जिससे बच्चे उनको अपना आदर्श मान सकें और वे कक्षा की गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर भाग ले सकें | दूसरी पुस्तक हैं सूक्ष्म शिक्षण पर. लेखक डॉ भारद्वाज ने इस पुस्तक को बी.एड छात्र-शिक्षकों हेतु लिखा है. अनेक उदाहरण देकर सूक्ष्म शिक्षण की अवधारणा को स्पष्ट किया है. हर शिक्षण कौशल हेतु पाँच-पाँच पाठ प्रारूप दिए हैं जिससे छात्र-शिक्षक लाभ उठा सकें. डॉ भारद्वाज का कहना है कि सूक्ष्म शिक्षण कोई नई विधि नहीं है. ट्यूटोरियल कक्षाएं सूक्ष्म शिक्षण ही तो होती हैं. इसके अलावा समझदार शिक्षक कठिन विषय या उपविषय को छोटा छोटा भाग कर के पढ़ाया करते हैं. दोनों पुस्तकें शिक्षकों हेतु लाभकारी रहेगी |



