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Sajjan Kumar Death लाखों लोगो के दिलों की धड़कन थे सज्जन कुमार जो मिल लेता था उसी के हो जाते थे -अश्वनी भारद्वाज –

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Sajjan Kumar Death लाखों लोगो के दिलों की धड़कन थे सज्जन कुमार जो मिल लेता था उसी के हो जाते थे
-अश्वनी भारद्वाज –

नई दिल्ली ,धरती पुत्र, गरीबों के मसीहा, सभी के भाई साहब और ना जाने किस-किस नाम से प्रचलित रहे पूर्व सांसद सज्जन कुमार नहीं रहे, यह सुनकर हमें भी धक्का लगा | उन्हें 1984 के सिख दंगों के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई गई थी | वो तिहाड़ जेल में थे | जेल जाने से पहले उनका व्यवहार एकदम सामजिक था | जैसा नाम वैसा ही व्यवहार सज्जनता से भरपूर आचरण का दूसरा नाम था सज्जन कुमार | जी हाँ हम एकदम सही कह रहे है जिन लोगो का सज्जन कुमार से सीधे वास्ता रहा है वो हमारी बात की तसदीक कर सकते हैं | करीब तीन दशक तक ना केवल दिल्ली की कांग्रेस राजनीति में अपितु दिल्ली की सियासत में मजबूत धुरी रहे थे सज्जन कुमार और कांग्रेस में तो उनकी मर्जी के बिना दिल्ली में पत्ता भी नहीं हिलता था | जिसकी एक वजह थी पार्टी हाईकमान से लेकर एक साधारण कार्यकर्ता तक उनकी जमीनी पकड़ | और शायद यही वजह थी 84 के दंगे के संगीन आरोप लगने के बावजूद पार्टी उनकी मर्जी से ही चुनावों में प्रत्याशी उतारती थी | जहां तक उनकी सियासी पारी का सवाल है सभी उससे वाकिफ है | राजनितिक हस्ती के साथ-साथ सज्जन कुमार एक सामजिक नेता के तौर पर भी उतने ही लोकप्रिय थे और होते भी क्यों नहीं सभी के सुख-दुःख में खड़े जो रहते थे ,और पत्रकार बिरादरी का तो वे बहुत जयादा सम्मान किया करते तकरीबन हर महीने पत्रकारों को चाय और भोजन पर बुलाना ,उनके घरों पर खुद समय लेकर पहुंच जाना उनकी खासियत थी |
अपने से छोटो को भी भाई साहब कहकर बुलाना उनकी आदत में शुमार था | प्रशासन पर भी उनकी जबर्दस्त पकड़ थी ,उनके एक फोन को ही अधिकारी कड़ा आदेश मानते थे दूसरे शब्दों में उनके घर से कभी भी कोई खली हाथ नहीं लौटता था | दिल्ली की सियासत में उन्होंने पचास से ज्यादा मजबूत चेहरे विकल्प के रूप में खड़े किये यह बात अलग है उनके विपत्ति के दौर में ज्यादातर नें उनसे दूरी बना ली थी | हमारा भी उनसे छात्र राजनीती के समय से सम्बन्ध रहा वे लम्बे सम्बन्ध बनाना भी जानते थे और उन्हें निभाना भी जानते थे | एक घटना का जिक्र करना चाहूँगा नब्बे के दशक में एक बार सज्जन कुमार पूर्वी दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती होने के चलते पूर्व विधायक मुकेश शर्मा के साथ हमसे मिलने पहुंचे उन्हें लगा अस्पताल में सही उपचार नहीं हो रहा उसी समय उन्होंने राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल के एम.एस.से समय लिया और अगले दिन खुद साथ चलकर अस्पताल में हमारी जांच करायी | अब आप ही बताइए कितने मिलनसार थे सज्जन कुमार | उनके अनेक किस्से हमारे जहन में है लेकिन आज बस इतना ही ,ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें और उनके समर्थकों को यह दुख सहने करने की शक्ति प्रदान करें |

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