Home देश दुनिया Kerala Assembly Proposal: Kerala का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की तैयारी, विधानसभा...

Kerala Assembly Proposal: Kerala का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की तैयारी, विधानसभा प्रस्ताव के बाद बढ़ी प्रक्रिया

0
33

Kerala Assembly Proposal: Kerala का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की तैयारी, विधानसभा प्रस्ताव के बाद बढ़ी प्रक्रिया

तिरुवनंतपुरम। दक्षिण भारत का प्रमुख राज्य Kerala अब आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ नाम से जाना जा सकता है। राज्य सरकार ने कैबिनेट स्तर पर नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी कर ली है। यह फैसला 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले लिया जा रहा है, जिससे इस मुद्दे को राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने वर्ष 2024 में राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा था। उनका तर्क था कि मलयालम भाषा में राज्य को ‘केरलम’ कहा जाता है, जबकि संविधान की पहली अनुसूची में इसका नाम ‘केरल’ दर्ज है। सरकार चाहती है कि संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संशोधन कर आधिकारिक नाम ‘केरलम’ किया जाए और संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में भी यही नाम लागू हो।

25 जून 2024 को विधानसभा ने दूसरी बार इस प्रस्ताव को पारित किया था। पहली बार पारित प्रस्ताव की समीक्षा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने की थी और कुछ तकनीकी सुधार सुझाए थे। संशोधित प्रस्ताव दोबारा पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया। अब राज्य सरकार उम्मीद जता रही है कि केंद्र स्तर पर इसे अंतिम मंजूरी मिल सकती है।

सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में राज्य का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात कर सकता है। इससे पहले भी दक्षिण ब्लॉक में इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। यदि केंद्र सरकार और संसद से मंजूरी मिलती है तो संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ हो जाएगा।

इस बीच, राज्य की वामपंथी सरकार ने विधानसभा में ‘नेटिविटी कार्ड’ विधेयक भी पेश किया है। राजस्व मंत्री के राजन ने इसे ऐतिहासिक पहल बताया। प्रस्तावित कानून के तहत राज्य के मूल निवासियों को आधिकारिक पहचान पत्र जारी किया जाएगा, जिससे वे गर्व से स्वयं को ‘केरलवासी’ घोषित कर सकेंगे। हालांकि विपक्षी यूडीएफ ने शबरिमला सोना चोरी मामले को लेकर सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाम परिवर्तन का मुद्दा सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है और इससे क्षेत्रीय अस्मिता को मजबूती मिल सकती है। वहीं विपक्ष इसे चुनावी रणनीति के रूप में भी देख रहा है। अब सबकी निगाहें केंद्र सरकार के फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि अंतिम निर्णय संवैधानिक संशोधन के बाद ही संभव होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here