Jharkhand Anti Naxal Operation: सारंडा के जंगल में सुरक्षाबलों का बड़ा एक्शन, 17 नक्सलियों के शव बरामद
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षाबलों को एक बड़ी और निर्णायक सफलता हाथ लगी है। चाइबासा जिले के अंतर्गत आने वाले सारंडा के घने और दुर्गम जंगलों में सुरक्षाबलों की संयुक्त कार्रवाई में कुल 17 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं। इस मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों में कुख्यात नक्सली नेता पतिराम मांझी उर्फ अनल दा का नाम भी शामिल है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों का संचालन कर रहा था और सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।
यह अभियान 209 कोबरा बटालियन, चाइबासा जिला पुलिस और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीम द्वारा अंजाम दिया गया। खुफिया एजेंसियों से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने सारंडा के जंगलों में बड़े पैमाने पर घेराबंदी कर सघन तलाशी अभियान शुरू किया। यह ऑपरेशन करीब 24 घंटे तक लगातार चला, जिसमें घने जंगल, पहाड़ी इलाका और बेहद सीमित रास्ते होने के बावजूद सुरक्षाबलों ने पूरी सतर्कता और रणनीतिक सूझबूझ के साथ कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इलाके में नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद पूरे क्षेत्र को कई हिस्सों में बांटकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। इसी दौरान नक्सलियों की ओर से फायरिंग की गई, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालते हुए प्रभावी कार्रवाई की। मुठभेड़ के बाद अलग-अलग स्थानों से 17 नक्सलियों के शव बरामद किए गए, जिनमें 5 से 6 महिला नक्सली भी शामिल हैं। घटनास्थल से हथियार, गोला-बारूद और नक्सली सामग्री भी मिलने की संभावना जताई जा रही है, जिसकी जांच की जा रही है।
किरीबुरु के एसडीपीओ अजय केरकेट्टा ने इस ऑपरेशन की पुष्टि करते हुए बताया कि क्षेत्र को पूरी तरह से घेर लिया गया है और अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है। उन्होंने कहा कि इलाका बेहद दुर्गम और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन कोबरा कमांडो, जिला पुलिस और झारखंड जगुआर के जवानों ने असाधारण साहस और समन्वय का परिचय देते हुए इस अभियान को सफल बनाया। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी नक्सली के बच निकलने की संभावना को खत्म करने के लिए पूरे इलाके में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि मारे गए नक्सली नेता अनल दा और उसके सहयोगी लंबे समय से सारंडा और आसपास के क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने, नए कैडर की भर्ती और सुरक्षाबलों पर हमलों की साजिश रचने में लगे हुए थे। उनकी मौत से नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सुरक्षाबलों की इस बड़ी सफलता को झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान के लिए एक अहम मोड़ माना जा रहा है। लगातार हो रही सख्त कार्रवाई से यह साफ संकेत मिल रहा है कि सुरक्षाबल नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में भी पूरी मजबूती के साथ कार्रवाई करने में सक्षम हैं और राज्य को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं।



