Indigo crisis: इंडिगो संकट गहराया: 5000 फ्लाइट रद्द होने के बाद एंटीट्रस्ट जांच के संकेत, जानिए पूरा मामला
भारतीय एविएशन सेक्टर इन दिनों इंडिगो के बड़े ऑपरेशनल संकट से जूझ रहा है. पायलटों की कमी और नए रेस्ट नियमों के लागू न होने के बाद देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को इस महीने 5000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिससे यात्रियों में भारी नाराजगी देखने को मिली. अब इस संकट ने एक और गंभीर मोड़ ले लिया है, क्योंकि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) इंडिगो के खिलाफ एंटीट्रस्ट जांच शुरू करने पर विचार कर रहा है. शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार CCI यह जांच करेगा कि क्या इंडिगो ने मार्केट में अपनी 65% हिस्सेदारी का गलत फायदा उठाया, क्या उसने प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाले कदम उठाए या यात्रियों पर अनुचित शर्तें थोपीं. वहीं DGCA सरकार की मुख्य जांच को लीड कर रहा है और एयरलाइन के ऑपरेशनल फेल्योर पर सवाल उठा रहा है. इंडिगो के पास इस समय 2,422 कैप्टन की जरूरत थी, जबकि उपलब्ध केवल 2,357 ही हैं, जिससे बड़ी संख्या में उड़ानें प्रभावित हुईं. DGCA द्वारा कारण बताओ नोटिस भेजे जाने के बाद इंडिगो के CEO और COO ने जवाब के लिए अतिरिक्त समय मांगा, यह कहते हुए कि इतने बड़े नेटवर्क में क्रैश के मूल कारण का जल्दी पता लगाना संभव नहीं है. DGCA के नियमों के अनुसार किसी भी शो-कॉज नोटिस का जवाब देने के लिए 15 दिन का समय मिलता है, इसलिए उनका यह अनुरोध नियमों के दायरे में आता है. अगर CCI की शुरुआती जांच में पहली नजर में एंटी-कॉम्पिटिटिव गतिविधियों का संकेत मिलता है, तो वह डायरेक्टर जनरल को विस्तृत जांच का आदेश देगा. अगर ऐसा नहीं हुआ तो केस बंद कर दिया जाएगा. इंडिगो इससे पहले भी कई बार CCI के रडार पर आ चुकी है. ऐसी स्थिति में यह जांच एयरलाइन के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है और भारत के एविएशन उद्योग के लिए भी बड़ा असर डाल सकती है.



