Himachal Rain: हिमाचल में मॉनसून का कहर, मंडी में बादल फटा, तीन की मौत, सैकड़ों सड़कें बंद
हिमाचल प्रदेश में इस साल का मॉनसून जाते-जाते भी तबाही मचा रहा है। रविवार रात मंडी जिले के धरमपुर में बादल फटने से हालात भयावह हो गए। अचानक आई बाढ़ से पूरा बस स्टैंड जलमग्न हो गया और वहां खड़ी कई गाड़ियां व बसें बह गईं। पानी का तेज बहाव घरों और दुकानों में घुस गया, जिससे लोग रातों-रात छतों पर चढ़कर जान बचाने को मजबूर हो गए। प्रशासन और पुलिस ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया है, लेकिन अब तक एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है।
धरमपुर में मची तबाही के बीच मंडी के निहरी इलाके से और भी दुखद खबर सामने आई। यहां अचानक हुए भूस्खलन ने एक घर को पूरी तरह मलबे में दबा दिया। इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया। भारी चट्टानों और मलबे के गिरने से आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।
केवल मंडी ही नहीं, बल्कि शिमला, कांगड़ा और आसपास के कई पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन ठप कर दिया है। कांगड़ा हवाई अड्डे के पास पठानकोट-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनूनी में भारी भूस्खलन हुआ, जिससे घंटों लंबा जाम लग गया। सड़क से मलबा हटाने के लिए जेसीबी और अन्य मशीनें लगाई गईं, ताकि यातायात बहाल किया जा सके।
मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले 24 घंटों में जोगिंदरनगर में 56 मिमी, पालमपुर में 48 मिमी और पंडोह में 40 मिमी बारिश दर्ज की गई। कई जगहों पर तेज हवाएं और आंधी-तूफान ने भी तबाही बढ़ाई। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) के अनुसार, वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की 493 सड़कें बंद हैं, जिनमें तीन राष्ट्रीय राजमार्ग भी शामिल हैं। इसके अलावा 352 ट्रांसफार्मर और 163 जलापूर्ति योजनाएं भी ठप हो गई हैं।
अधिकारियों का कहना है कि 20 जून से अब तक मॉनसून से जुड़ी घटनाओं और सड़क हादसों में 409 लोगों की जान जा चुकी है और 41 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें से 180 मौतें सड़क दुर्घटनाओं में हुई हैं। अनुमान है कि राज्य को इस बार मॉनसून से 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
मौसम विभाग ने जानकारी दी कि 1 जून से 15 सितंबर तक हिमाचल में औसतन 991.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य स्तर 689.6 मिमी है। यानी इस बार 44 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है। आमतौर पर हिमाचल में मॉनसून 20 से 25 सितंबर के बीच समाप्त हो जाता है, लेकिन इस बार इसके अंतिम दिनों में भी प्रकृति का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है।



