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राजधानी होने के बावजूद दिल्ली में प्रदूष्ण की हालत चिंताजनक : भीष्म शर्मा

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राजधानी होने के बावजूद दिल्ली में प्रदूष्ण की हालत चिंताजनक : भीष्म शर्मा

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : भारत को विश्वगुरु बनाने का दम्भ भरने वाले देश की राजधानी दिल्ली के प्रदूष्ण को भी कम नहीं कर सकते और विकास की बातें तो दूर का ढोल सुहावना ही प्रतीत होता है | यह कहना है कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व विधायक भीष्म शर्मा का | भीष्म शर्मा कहते हैं दिल्ली-एनसीआर में नवंबर का महीना पिछले कुछ सालों का सबसे प्रदूषित महीना रहा। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान भारत के टॉप 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से ज्यादातर इसी इलाके में पाए गए। इस लिस्ट में राजधानी दिल्ली चौथे नंबर पर आई। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की रिपोर्ट के मुताबिक, हरियाणा के बहादुरगढ़ को छोड़ दें तो टॉप 10 शहरों में से किसी में भी एक दिन भी हवा साफ नहीं रही। यह प्रदूषण पूरे एनसीआर में फैला हुआ है और एक शहर का प्रदूषण दूसरे शहरों की हवा को भी खराब कर रहा है। हालांकि गाज़ियाबाद के हालत और भी ज्यादा खराब है और लिस्ट में उसका नम्बर सबसे ऊपर है | लेकिन दिल्ली देश की राजधानी है जहां प्रधानमन्त्री और राष्ट्रपति निवास भी तमाम विदेशी हस्तियों का आगमन यहाँ होता हैं |

दिल्ली में नवंबर में पीएम 2 .5 का औसत स्तर 215 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, जो अक्टूबर के मुकाबले दोगुना था। अक्टूबर में यह स्तर 107 µg/m³ था। दिल्ली में 23 दिन हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही और 6 दिन ‘गंभीर’ श्रेणी में। इससे पता चलता है कि सर्दियों में स्मॉग (धुएं और कोहरे का मिश्रण) कितना खतरनाक हो जाता है। भीष्म शर्मा कहते हैं ट्रिपल इंजन सरकार जिस तरह से मानसून के दौरान जलभराव को नहीं रोक सकी उसी तरह से प्रदूष्ण को रोकने में भी नाकाम साबित रही है | भीष्म शर्मा कहते हैं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा उनके मंत्री केवल बयानबाजी करते हैं जबकि जमीन पर उतर कर कोई काम नहीं करती | दीपवाली बाद से दिल्ली की हवा जहर उगल रही है | बुजुर्ग तथा बच्चे इससे प्रभावित हो रहे हैं | भीष्म शर्मा कहते हैं इस नवंबर में दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान काफी कम रहा। पिछले साल जहां यह 20 फीसदी था, वहीं इस साल यह औसतन 7 फीसदी रहा। सबसे ज्यादा योगदान भी 38फीसदी से घटकर 22 फीसदी हो गया। इससे यह संकेत मिलता है कि अब दिल्ली के स्मॉग के लिए स्थानीय, साल भर रहने वाले स्रोत जैसे कि ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और पावर जनरेशन मुख्य कारण बन गए हैं।

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