दिल्ली झेल रही है बसों की कमी ,महिलाओं को होती है सबसे ज्यादा परेशानी : नीलम चौधरी
नई दिल्ली ( रवि कुमार ) : ट्रिपल इंजन की सरकार राजधानी की परिवहन व्यवस्था को सुधारने में लगातार नाकाम साबित हो रही है | आज हालात इतने ज्यादा खराब हो चुके हैं की दिल्ली का परिवहन सिस्टम एकदम लड़खड़ा रहा है जिसके चलते लोगो और खासतौर से महिलाओं को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ता है | यह कहना है समस्त आर.डब्लू.ए.रोहताश नगर की संस्थापक अध्यक्ष वरिष्ठ कांग्रेस नेता नीलम चौधरी का | नीलम चौधरी कहती हैं कि लम्बे समय से दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था जनता के अनुपात के अनुसार अधिक दबाव में है और डीटीसी बेड़े में बसों की संख्या सिर्फ सवा तीन हजार के आसपास ही रह गई है जो 12 वर्षों में सबसे कम है, यह जानकारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में सामने आई है। नीलम चौधरी कहती हैं पिछली आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा 2019 में डीटीसी में महिलाओं को मुफ्त यात्रा जारी करने को भाजपा ने जारी जरुर रखा लेकिन केजरीवाल सरकार की तरह रेखा गुप्ता सरकार भी दिल्ली की सड़कों से लगातार हटती डीटीसी बसों को रोक नही सकी है जिसके कारण पिछले 5 वर्षों में डीटीसी और कलस्टर बसों की प्रतिदिन यात्रा में 20 प्रतिशत की कमी आई है। रेखा गुप्ता सरकार द्वारा दिल्ली वासियों को बेहतर परिवहन व्यवस्था देने की सोच इस बात से उजागर होती है कि पिछले 2025-26 में डीटीसी का बजट 91 सौ 10 करोड़ था, वहीं 2026-27 इस वर्ष डीटीसी के बजट में 736 करोड़ की कटौती करके 83 सौ 74 करोड़ रखा है। नीलम चौधरी कहती हैं कि भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार दिल्ली में महिलाओं को डीटीसी के अंतर्गत चलने वाली बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा तो दे रही है, लेकिन आर्थिक सवेक्षण 2025-26 में डीटीसी और बसों की संख्या जनसंख्या के अनुपात के अनुसार लगातार कम हो रही और भाजपा का महिलाओं को मुफ्त यात्रा दावा धोखा साबित हो रहा है। बस स्टैंड पर घंटों बसों को इंतजार करने के बावजूद बसें नही आती है, कई बार तो एक ही स्टेंड पर बड़ी संख्या में सवारी बसों का इंतजार करते दिखाई देती है जिनमें महिलाओं की संख्या अधिक होती है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में 2013-14 में डीटीसी की 5223 बसें थी, जो 38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2025-26 में सिर्फ 3213 बसें रह गई है।



