Delhi Fire: शाहदरा चप्पल मार्केट में समोसा रेहड़ी पर गैस सिलेंडर फटा, आग की लपटों से मचा हड़कंप—स्कूटी जलकर राख, विक्रेता गंभीर रूप से झुलसा
दिल्ली के शाहदरा जिले के कसाईवाड़ा स्थित चप्पल मार्केट में शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया, जब एक समोसा विक्रेता की रेहड़ी पर रखा गैस सिलेंडर अचानक फटने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आम दिन की तरह बाजार में भारी भीड़ थी, दुकानों के सामने ग्राहक खड़े थे और कई लोग समोसे की रेहड़ी के आसपास मौजूद थे। तभी अचानक रेहड़ी के नीचे रखा छोटा गैस सिलेंडर पहले धुआं छोड़ने लगा और देखते ही देखते उसमें भीषण आग भड़क उठी।
घटना इतनी तेजी से हुई कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। चंद सेकंड में आग की लपटें 10-12 फीट तक उठने लगीं, जिससे आसपास भगदड़ की स्थिति बन गई। रेहड़ी पूरी तरह जलकर मलबे में तब्दील हो गई और पास में खड़ी एक स्कूटी भी आग की चपेट में आकर पूरी तरह जलकर राख हो गई। आग की वजह से समोसा विक्रेता गंभीर रूप से झुलस गया। सीसीटीवी फुटेज में साफ नजर आता है कि गैस लीकेज के कुछ ही पल बाद सिलेंडर जोर से भभकता है और आग फैल जाती है, जिससे मौके पर मौजूद लोग घबराकर इधर-उधर भागने लगते हैं।
दिलचस्प और चिंताजनक बात यह रही कि शुरुआत में तमाशबीन लोग घटना को सिर्फ वीडियो में कैद करते रहे, लेकिन किसी ने तुरंत सहायता करने की कोशिश नहीं की। तभी भीड़ में मौजूद एक युवक ने हिम्मत दिखाते हुए घायल विक्रेता को उठाकर तुरंत हेडगेवार आरोग्य संस्थान पहुँचाया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार विक्रेता के हाथ और चेहरे पर गंभीर जलन है।
स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि चप्पल मार्केट की गलियां काफी तंग हैं और लंबे समय से अवैध पार्किंग की समस्या बनी हुई है, जिसके कारण गाड़ियों और रेहड़ियों के बीच मुश्किल से रास्ता बन पाता है। उनका कहना है कि यदि आग थोड़ी और देर तक भड़कती या सिलेंडर धमाके से फट जाता, तो पूरा इलाका विस्फोट से तबाह हो सकता था और कई लोगों की जान जा सकती थी। साथ ही, बाजार में कोई भी अग्निशमन साधन मौजूद नहीं था, जिससे स्थिति और भी खतरनाक हो गई।
फिलहाल पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है और मार्केट में अवैध पार्किंग व सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर गहन निरीक्षण की तैयारी की जा रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि प्रशासन को लंबे समय से कई शिकायतें दी गईं, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यह हादसा एक बार फिर बड़े बाजारों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की गंभीर कमी की ओर इशारा करता है और सवाल उठाता है कि आखिर कब तक असुरक्षित व्यवस्था और लापरवाही आम जनता की जान जोखिम में डालती रहेगी।



