Delhi Earthquake: दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में दो दिन में दो बार कांपी धरती, झज्जर रहा भूकंप का केंद्र, लोगों में दहशत
नई दिल्ली, 11 जुलाई — दिल्ली-एनसीआर समेत हरियाणा के कई हिस्सों में शुक्रवार शाम एक बार फिर धरती कांपी। शाम करीब 7:45 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.7 मापी गई। इसका केंद्र हरियाणा के झज्जर जिले में था और इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर रही। इससे ठीक एक दिन पहले, गुरुवार सुबह भी दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे, जिसकी तीव्रता 4.4 थी। लगातार दो दिनों में आए भूकंप ने आम जनता के बीच दहशत की स्थिति पैदा कर दी है।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, शुक्रवार को आया भूकंप झज्जर के अक्षांश 28.68 डिग्री उत्तर और देशांतर 76.72 डिग्री पूर्व पर स्थित था। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह झटका भूगर्भीय हलचलों का परिणाम था और इसकी गहराई 10 किमी होने के कारण इसका असर आसपास के क्षेत्रों में व्यापक रूप से महसूस किया गया।
भूकंप के झटकों के कारण दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, झज्जर, रोहतक, पानीपत, गुरुग्राम और मेरठ तक लोगों में खौफ का माहौल देखने को मिला। कई लोग अपने घरों से तुरंत बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों पर खड़े हो गए। विशेषकर ऊंची इमारतों में रहने वाले नागरिक अधिक घबराए हुए नजर आए।
लोगों में गहराया डर
विकासपुरी निवासी सुल्तान खान ने बताया, “हमें अचानक ऐसा लगा जैसे पूरा घर हिल रहा हो। हम तुरंत बाहर भागे। पहले तेज गर्मी, फिर रातभर की बारिश और अब भूकंप — इन तीनों ने मानसिक रूप से थका दिया है।”
एक अन्य निवासी अहमद अली ने कहा, “यह एक बेहद डरावना अनुभव था। भले ही झटका बहुत लंबा नहीं चला, लेकिन इतना तीव्र था कि मेरी नींद टूट गई और बच्चे अब भी सहमे हुए हैं।”
झज्जर जिले के एक बुजुर्ग ने बताया, “मेरी उम्र में ऐसा झटका पहली बार महसूस किया है। पूरा मोहल्ला सड़कों पर आ गया था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि क्या करें।”
लगातार दूसरे दिन कंपन से बढ़ा डर
इससे पहले गुरुवार सुबह 9:04 बजे भी दिल्ली और आसपास के इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। तब भी केंद्र झज्जर ही था, जो दिल्ली से 51 किलोमीटर पश्चिम दिशा में स्थित है। गुरुवार को भूकंप की तीव्रता 4.4 मापी गई थी और झटके करीब 10 मिनट तक महसूस किए गए, जिससे बहुमंजिला इमारतों में अफरा-तफरी मच गई थी।
भूकंप के झटकों से निपटने के लिए लोग तैयार नहीं दिखे। ना तो आवासीय सोसायटीज़ में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी थे और न ही आपातकालीन निकास योजनाएं। लोग अपने-अपने तरीके से खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश करते दिखे।
विशेषज्ञों की चेतावनी
भूकंप विज्ञानियों का कहना है कि झज्जर क्षेत्र दिल्ली फॉल्ट लाइन के काफी करीब है, जहां समय-समय पर हलचलें होती रहती हैं। बार-बार छोटे भूकंप एक बड़े भूकंप के पूर्व संकेत हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन सतर्क जरूर रहें और अपने घरों तथा कार्यालयों में आपदा प्रबंधन योजना बनाएं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
दो दिनों में आए भूकंप के बावजूद स्थानीय प्रशासन या राज्य सरकार की ओर से कोई विशेष आपातकालीन निर्देश या जन सूचना जारी नहीं की गई। लोगों का कहना है कि इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए सरकारी स्तर पर ज्यादा गंभीरता की जरूरत है।
निष्कर्ष
बार-बार आ रहे भूकंप ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा का क्षेत्र अब सिस्मिक रूप से ज्यादा संवेदनशील हो रहा है। ऐसे में जरूरी है कि नागरिकों के साथ-साथ प्रशासन भी भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अधिक सजग और तैयार रहे।


