निगम और सरकार आवारा कुत्तों से निपटने के लिए हुई सक्रिय : श्री दत्त शर्मा
* सरकार के कदम से मिलेगी लोगो को राहत
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : राजधानी दिल्ली में और खासतौर से यमुनापार में आवारा कुत्ते लोगो की परेशानी बन चुके है | रोजाना दर्जनों लोग इनकी चपेट में आने से जख्मी हो जाते हैं लेकिन अब दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार नें इस समस्या से निपटने के लिए इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं | यह कहना है पूर्व विधायक श्री दत्त शर्मा का |
श्रीदत्त शर्मा कहते हैं एमसीडी कल यानी पांच अगस्त से आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का महाअभियान शुरू करने जा रही है | इसके साथ साथ करीब एक दर्जन निर्वाचन क्षेत्रों में महीने भर पायलट परियोजना चलेगी, जिसमें कोशिश होगी कि बड़ी संख्आया में वारा कुत्तों की नसबंदी कर दी जाए | शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एमसीडी की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा के निर्देशों के तहत गठित समिति की बुधवार को हुई पहली बैठक में यह निर्णय लिया गया | लिए गए इस निर्णय से लोगो को काफी राहत मिलने की सम्भावना है | श्री दत्त शर्मा कहते हैं दिल्ली में आवारा कुत्तों और मवेशियों के हमलों की घटनाएं दिनप्रति चिंताजनक रूप लेती जा रही हैं. हाल ही में एक 6 साल की बच्ची की कुत्ते के काटने से मौत के बाद मामला और गंभीर हो गया है | गत दिनों मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें इस समस्या से निपटने के लिए कानूनी बदलाव सहित कई उपायों पर चर्चा की गई |
बैठक में यह विचार सामने आया कि यदि अदालत की अनुमति मिले, तो इन कुत्तों को दूसरी जगह शिफ्ट करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है | उल्लेखनीय है कि रोहिणी के पूठ कलां इलाके में एक बच्ची की मौत से स्थानीय लोग आक्रोश से भरे हैं | इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली और आसपास के इलाकों में रोज़ाना दर्ज हो रहे सैकड़ों डॉग बाइट मामलों पर चिंता जताई. कोर्ट ने कहा कि ये घटनाएं ना सिर्फ़ शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी नागरिकों को प्रभावित कर रही हैं, और सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बुजुर्गों को है |
श्री दत्त शर्मा कहते हैं फिलहाल सरकार अंतिम निर्णय से पहले कानूनी सलाह और अदालत के रुख का इंतजार कर रही है. हालांकि, इस विषय पर हो रही सक्रियता से यह स्पष्ट है कि अब दिल्ली सरकार और न्यायपालिका दोनों ही इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में एकमत हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रिलोकेशन की अनुमति मिलती है, तो यह देश भर के लिए एक मिसाल बन सकती है |



