Congress Delhi: जिला अध्यक्ष चयन में रायशुमारी के साथ-साथ जातीय समीकरण भी साधना चाहेगी कांग्रेस
दलित और मुस्लिम वर्ग पर रहेगा पूरा फोकस
– अश्वनी भारद्वाज –
नई दिल्ली ,हैडलाइन में ही वैसे तो पूरी बात कह दी गयी है फिर भी थोडा सा प्रकाश डाल देते हैं | आपको मालुम ही है कि कांग्रेस आजकल संगठन सृजन अभियान चला रही है बीस राज्यों में यह अभियान लगभग पूरा हो चुका है राजधानी दिल्ली में भी बड़ी तेजी के साथ यह अभियान चल रहा है | अलग-अलग राज्यों से आये पार्टी के वरिष्ठ नेता दिल्ली के कार्यकर्ताओं की राय ले रहे हैं,नेताओं से भी पूछा जा रहा है कौन होना चाहिए जिला कांग्रेस का अध्यक्ष | एक दो जिलों को छोडकर यह अभियान व्यवस्थित तरीके से चल रहा है | यह बात अलग है जिस पद के चयन के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है यह अभियान उन्हीं लोगो के इर्द गर्द ही घूम रहा है | समझ गये ना आप यानी जिला कांग्रेस के अध्यक्ष ही इस अभियान की धुरी बने हुए हैं जबकि कायदे से उन्हें इस अभियान में वही महत्व मिलना चाहिए था जो एक साधारण कार्यकर्ता को | यह बात जरुर है राय अलग-अलग बुलाकर ली जा रही है और प्रदेश नेत्रत्व नें सभी जिलों में व्यवस्था के लिए अपने प्रतिनिधि तैनात किये हुए हैं लेकिन सभी स्थानों पर जिला अध्यक्षों की मौजूदगी कार्यकर्ताओं को असहज करती है इस सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता |

बरहाल यह पार्टी का अंदरूनी मसला है लेकिन इस पर भी पार्टी हाईकमान की नजर है यानी आप माने या नहीं माने इसे से ले पार्टी का शीर्ष नेत्रत्व बेहद गम्भीर है | पार्टी का मानना है रायशुमारी ईमानदारी के साथ बिना किसी प्रेशर के होनी चाहिए और यदि किसी नें इसे प्रभावित करने का प्रयास भी किया तो पार्टी उसे गम्भीरता से लेगी | जिसके लिए पर्यवेक्षकों की जवाबदेही तक शामिल होना तय है | अब तो आप समझ ही गये होंगे पार्टी का स्टैंड | इस पूरी कवायद के लिए बाकायदा पर्यवेक्षकों को ट्रेंनिग तक दी गयी है और उन्हें दिए गये तमाम दिशा निर्देशों का पालन करने को कहा गया है | अब रायशुमारी से अलग हटकर भी चर्चा कर लेते हैं ,पर्यवेक्षकों को क्षेत्र के जातीय समीकरण भी प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है यानी कौन-कौन से क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य हैं तो किस-किस क्षेत्र में दलित ज्यादा तादाद में है ब्राह्मण हो या पिछड़े वर्ग के लोग कहाँ किस-किस का बोलबाला है | यानी फैंसला लेते समय जातीय समीकरणों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा | पार्टी के रणनीतिकारों को यह अच्छे से मालुम है कि पिछले लोकसभा चुनावों में दलित तथा मुस्लिम लामबंद हो गठ्बन्धन के साथ खड़े थे लिहाजा पार्टी संगठन सृजन अभियान के तहत उनकी अनदेखी नहीं करना चाहेगी और उन्हें उनके अनुपात के मुताबिक सम्मान देने से भी पीछे नहीं हटेगी | किस -किस जिले में पड़ेगा इन समीकरणों का असर इसकी चर्चा फिर कभी ,आज बस इतना ही …



