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CJP Protest: बेंगलुरु में अभिजीत दिपके, ध्रुव राठी और प्रकाश राज का SIR विरोधी प्रदर्शन; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े आंदोलन का ऐलान

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CJP Protest: बेंगलुरु में अभिजीत दिपके, ध्रुव राठी और प्रकाश राज का SIR विरोधी प्रदर्शन; CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े आंदोलन का ऐलान

बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में गुरुवार को चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित इस प्रदर्शन में पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने SIR प्रक्रिया को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे भी लगाए गए।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अभिजीत दिपके ने दावा किया कि SIR के जरिए ऐसे मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं, जो सरकार या बीजेपी का विरोध करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर कर सकते हैं। हालांकि, ये दावे प्रदर्शनकारियों के आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है।

दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर भी तीखे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि नरेंद्र मोदी ‘वोट चोरी’ के जरिए प्रधानमंत्री बने हैं। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार CEC के पद से इस्तीफा नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग केवल CEC के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि SIR को खत्म करने के बाद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच की जानी चाहिए।

दिपके ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए। बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें अब भी सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद है, तो उन्होंने न्यायपालिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र को लेकर मौजूदा परिस्थितियों में अदालत से उम्मीद करना मुश्किल है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पुराने रुख का भी हवाला दिया। ये उनके व्यक्तिगत राजनीतिक आरोप और टिप्पणी हैं।

प्रदर्शन में शामिल ध्रुव राठी ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। राठी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले करीब 70 हजार मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए और चुनाव के बाद उनमें से कई नाम फिर दिखाई दिए। उन्होंने बिहार में भी करीब 65 लाख नाम हटाए जाने का दावा किया और चुनाव आयोग पर पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। ये आंकड़े और आरोप राठी के भाषण में किए गए दावे हैं, जिन्हें चुनाव आयोग के आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

ध्रुव राठी ने प्रदर्शन के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि वह सत्ता परिवर्तन के लिए प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए हैं। उन्होंने SIR को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की और कहा कि चुनाव आयोग से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए। उनके भाषण के दौरान प्रदर्शनकारियों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारे लगाए।

अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने भी SIR के खिलाफ अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि मामला केवल वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों के अधिकार और सम्मान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने SIR प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग की। प्रदर्शन में महिलाओं, छात्रों और सिविल सोसायटी से जुड़े लोगों की भी भागीदारी रही। कई प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर दिखाई दिए जिनमें वोटर लिस्ट में नाम से जुड़े सवाल और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की मांग की गई थी।

बेंगलुरु का यह प्रदर्शन करीब पांच घंटे तक चला। इसमें सिविल सोसायटी संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों से जुड़े लोग भी शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ नारा प्रमुख रहा। कर्नाटक के कई सामाजिक और नागरिक संगठनों ने भी SIR को लेकर चिंता जताई। प्रदर्शन में लेखक देवनूर महादेव, फिल्ममेकर कविता लंकेश, AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर और सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश गोपाल गौड़ा सहित कई लोग शामिल हुए।

सौरव दास ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि ज्ञानेश कुमार और उनके कथित ‘आकाओं’ के खिलाफ देश के लोग एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी प्रदर्शन को लेकर पोस्ट किया और आंदोलन जारी रखने की बात कही। CJP की ओर से कहा गया है कि उनका आंदोलन केवल बेंगलुरु तक सीमित नहीं रहेगा।

इसी क्रम में CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। अभिजीत दिपके ने कहा कि अगर मुंबई और बेंगलुरु में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो सकता है तो दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी लोगों को प्रदर्शन करने की अनुमति मिलनी चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर को लोकतांत्रिक विरोध के लिए निर्धारित स्थान बताते हुए दिल्ली में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की अपील की है।

SIR को लेकर देश में राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है। विपक्षी दल और कुछ नागरिक संगठन आरोप लगा रहे हैं कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर वैध मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग की ओर से चुनावी सूची को कानूनी प्रक्रिया के तहत संशोधित करने की बात कही गई है। इसी विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं।

बेंगलुरु के प्रदर्शन ने इस राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया है। एक तरफ CJP और प्रदर्शनकारी SIR को तत्काल खत्म करने तथा CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस जारी है। अब सभी की नजर 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित CJP प्रदर्शन पर है, जहां आंदोलन को और बड़ा रूप देने की तैयारी की जा रही है।

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