Bihar Cabinet Expansion सम्राट कैबिनेट का विस्तार, निशांत कुमार बने मंत्री
बिहार की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला जब मुख्यमंत्री Samrat Choudhary के नेतृत्व वाली कैबिनेट का विस्तार किया गया। राजधानी पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में कई वरिष्ठ नेताओं और नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। इस मौके पर प्रधानमंत्री Narendra Modi की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया।
कैबिनेट विस्तार के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar की रही, जिन्होंने मंत्री पद की शपथ लेकर बिहार की सक्रिय राजनीति में औपचारिक एंट्री कर ली। उनके साथ विजय कुमार सिन्हा, लेशी सिंह, श्रवण कुमार और दिलीप जायसवाल ने भी मंत्री पद की शपथ ली। समारोह में भगवान सिंह कुशवाहा, अरुण शंकर प्रसाद, मदन सहनी, संतोष सुमन और रमा निषाद समेत कई नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई।
इसके अलावा रत्नेश सादा, शैलेंद्र उर्फ बुलो मंडल, शीला कुमारी मंडल, केदार प्रसाद गुप्ता और लखेंद्र रौशन ने भी मंत्री पद की शपथ ली। मंत्रिमंडल में शामिल अन्य नामों में सुनील कुमार, श्रेयसी सिंह, मोहम्मद जमा खान, नंद किशोर प्रसाद और इंजीनियर शैलेंद्र शामिल रहे। वहीं प्रमोद कुमार, श्वेता गुप्ता, मिथिलेश तिवारी, रामचंद्र प्रसाद, संजय कुमार सिंह, संजय कुमार और दीपक प्रकाश ने भी मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
शपथ ग्रहण समारोह का समापन राज्यपाल Syed Ata Hasnain की अनुमति के बाद राष्ट्रगान के साथ किया गया। कार्यक्रम में एनडीए के कई बड़े नेता मौजूद रहे और इसे बिहार की राजनीति में नए समीकरणों के तौर पर देखा जा रहा है।
हालांकि इस कैबिनेट विस्तार के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला भी बोला है। राजद नेता Rohini Acharya ने निशांत कुमार को बिना चुनाव लड़े मंत्री बनाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह “चोर दरवाजे से शॉर्टकट एंट्री” है। इसके साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार पर भी निशाना साधते हुए पुराने राजनीतिक मूल्यों को लेकर टिप्पणी की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निशांत कुमार की एंट्री बिहार की राजनीति में आने वाले समय में बड़ा बदलाव ला सकती है। लंबे समय से राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत का अचानक मंत्रिमंडल में शामिल होना कई नए संकेत दे रहा है। इसे जेडीयू और एनडीए की भविष्य की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
बिहार कैबिनेट के इस विस्तार ने राज्य की राजनीति को नई दिशा देने का काम किया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नई टीम सरकार के कामकाज और आगामी चुनावी रणनीति में किस तरह की भूमिका निभाती है।



