Abhijeet Dipke Detention: अभिजीत दिपके की हिरासत पर भड़के अरविंद केजरीवाल, बोले- मोदी राज में तानाशाही
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और देश में तानाशाही का आरोप लगाया। केजरीवाल ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को रोकने और हिरासत में लेने की कार्रवाई सरकार के डर को दिखाती है। उनका आरोप है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने वालों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
अभिजीत दिपके को शुक्रवार, 16 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने उस समय हिरासत में लिया, जब वह कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च में शामिल होने के लिए निकल रहे थे। CJP ने इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाने का ऐलान किया था। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं। इसी मुद्दे को लेकर पार्टी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है।
दिल्ली पुलिस ने मार्च से पहले दिपके को नोटिस जारी कर बताया था कि कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क और आसपास के इलाके में प्रतिबंध लागू हैं। पुलिस के मुताबिक, प्रस्तावित मार्च के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी और बिना अनुमति भीड़ जुटाने से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। इसी आधार पर पुलिस ने उन्हें मार्च में शामिल होने से रोकते हुए हिरासत में लिया। दिपके ने कार्रवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब वह अकेले जा रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा मार्च में शामिल होना चाहते हैं, तो उन्हें किस कानून के तहत रोका जा रहा है।
केजरीवाल ने इससे पहले भी CJP नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उनका कहना रहा है कि सरकार चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का भी समर्थन किया। हालांकि, मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर निर्वाचन आयोग का पक्ष है कि इस प्रक्रिया में मृत, दूसरी जगह जा चुके और सत्यापन के दौरान नहीं मिल पाए मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। पात्र मतदाताओं को अपना नाम दोबारा दर्ज कराने का अवसर भी दिया जाता है।
CJP के दो अन्य नेता सौरव दास और आशुतोष रांका भी पहले पुलिस कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। उन्हें जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था और न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। पार्टी ने इन गिरफ्तारियों के विरोध में ही तिरंगा मार्च निकालने की घोषणा की थी। दिपके की हिरासत के बाद CJP समर्थकों ने भी कार्रवाई पर नाराजगी जताई और अपने आंदोलन को जारी रखने की बात कही।
इस घटनाक्रम ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन की अनुमति, सार्वजनिक व्यवस्था और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। जहां CJP और विपक्षी नेताओं का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाया जा रहा है, वहीं पुलिस का कहना है कि कार्रवाई लागू प्रतिबंधों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई। अब इस मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के साथ-साथ पुलिस की आगे की कार्रवाई पर भी नजर बनी हुई है।



