शक्ति को सशक्त करने में वरदान साबित होगा एचपीवी टीकाकरण : डॉ ममता त्यागी
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : भारत में नारी-शक्ति की उपासना केवल सांस्कृतिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है ।। नवरात्रि के पावन अवसर पर हम देवी स्वरूपा शक्ति की आराधना करते हैं, किंतु वास्तविक श्रद्धा तब सार्थक होगी जब हम समाज की प्रत्येक बेटी के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा सुनिश्चित होगी ।
मोदी सरकार द्वारा राष्ट्रव्यापी एचपीवी (ह्यूमन पैपीलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान का निर्णय इस दिशा में एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी कदम है, जो आने वाले वर्षों में करोड़ों महिलाओं के जीवन को कैंसर से सुरक्षित बनाने की क्षमता रखता है । वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ एवं प्रदेश प्रवक्ता भाजपा , डॉ ममता त्यागी ने बताया कि विगत कई वर्षों से वे प्रयासरत थीं कि सरकार एचपीवी टीकाकरण को ( यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन कार्यक्रम ) में शामिल करे क्योंकि सर्वाइकल कैंसर आज भी भारतीय महिलाओं के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है , देश में प्रतिवर्ष लगभग 1.2 से 1.3 लाख नए मामले सामने आते हैं और लगभग 75,000 से 80,000 महिलाओं की मृत्यु इस बीमारी के कारण हो जाती है। यह केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक पीड़ा का भी प्रश्न है।
जब परिवार की एक महिला इस बीमारी से जूझती है, तो पूरा परिवार मानसिक आघात, आर्थिक बोझ और असुरक्षा से गुजरता है। सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामले एचपीवी संक्रमण से जुड़े होते हैं, और समय पर लगाया गया एचपीवी टीका 70 से 90 प्रतिशत तक मामलों की रोकथाम में प्रभावी सिद्ध हो सकता है। 9 से 14 वर्ष की आयु में टीकाकरण भविष्य में होने वाले संक्रमण के जोखिम को अत्यंत कम कर देता है। यदि देश की करोड़ों किशोरियों तक यह वैक्सीन प्रभावी रूप से पहुँचती है, तो आने वाले दशकों में सर्वाइकल कैंसर की दर में ऐतिहासिक गिरावट देखी जा सकती है। यह पहल केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं है अपितु यह नारी-सशक्तिकरण का सशक्त साधन है। जब एक बेटी स्वस्थ होगी, तभी वह आत्मविश्वास के साथ शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के अवसरों का लाभ उठा सकेगी। इस दृष्टि से एचपीवी टीकाकरण अभियान “शक्ति को सशक्त” करने का वास्तविक और व्यावहारिक प्रयास है।



