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उपन्यास ‘द बटरफ्लाई इज रीबोर्न’ में भी नायिका धोखा खाती है : डॉ.के.एस.भारद्वाज

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डॉ.के.एस.भारद्वाज
उपन्यास ‘द बटरफ्लाई इज रीबोर्न’ में भी नायिका धोखा खाती है : डॉ.के.एस.भारद्वाज

उपन्यास ‘द बटरफ्लाई इज रीबोर्न’ में भी नायिका धोखा खाती है : डॉ.के.एस.भारद्वाज

स्त्री मोहब्बत की देवी भी है उसे अपनी क्रूरता का एहसास ज़ल्दी हो जाता है.

– हर्ष भारद्वाज –

नई दिल्ली ,मानव, विशेषकर महिलाएं हालात की मारी होती हैं. मोहब्बत में तो वे सदा ही धोखा खाती रहती हैं. पेन टू प्रिंट पब्लिशिंग प्रकाशित उपन्यास ‘द बटरफलाई इज रीबोर्न’ में भी नायिका धोखा खाती है, परिणामस्वरुप उसके अंदर की प्रेम तितली मर जाती है, वही तितली गिद्ध बन कर धोखेबाज़ से अपने तरीके से बदला लेती है. एक और परिणाम यह होता है कि नायिका को पूरी पुरुष जाति से नफरत हो जाती है और विवाह कभी नहीं करती |

उपन्यास के लेखक डॉ.के.एस.भारद्वाज नें अपनी रचना में बखूबी से इस तथ्य का वर्णन किया है | मगर यह भी सच है स्त्री मोहब्बत की देवी भी है और उसे अपनी क्रूरता का अहसास पुरुष की अपेक्षा ज़ल्दी हो जाया करता है. जैसे ही नायिका को अहसास हुआ कि उसने अपने प्रेमी को कुछ अधिक ही सजा दे दी है, उसके अंदर की प्रेम तितली पुनर्जीवित हो जाती है और वह अपने तरीके से प्रायश्चित करने लगती है.

प्रायश्चित स्वरूप वह आजीवन अविवाहित रहने का प्रण ले लेती है और बिछुडे प्रेमियों को पुन: मिलाने के अभियान में जुट जाती है. स्त्रियाँ प्रबंधन में भी बेहद कुशल होती हैं. पूरे घर को वे ही तो संभालती है. एम.बी.ए करने के बाद नायिका एक एम.एन.सी में कर्मचारी कल्याण अधिकारी के पद पर नियुक्त हो जाती है और वहाँ भी यौन-विक्षिप्तों से महिला कर्मचारियों की रक्षा करती है. शनै: शनै: वह मुख्य प्रबंधक के पद तक पहुँच जाती है. समय आने पर मुख्य प्रबंधक के पद से सेवानिवृत होकर साध्वी बन जाती है, ऋषिकेश में फ़ार्महाउस स्थापित कर के उसी में एक कन्या महाविद्यालय की स्थापना करती है जो लड़कियों को निशुल्क शिक्षा देता है.

जीवन के लक्ष्य पूरे होने पर वह गंगा में जल समाधि लेकर अपनी इहलीला समाप्त कर लेती है और उस संसार में पहुँचती है जो पृथ्वी तथा स्वर्ग के बीच में है. वहीं अपने बिछुड़े सभी स्नेहीजनों से उसका पुनर्मिलन होता है. पुनर्मिलन तो हुआ मगर अब उसके पूर्व प्रेमी को उसके मुँहबोले भाई से ईर्षा हो जाती है. परिणामस्वरूप मध्यलोक का स्वामी उसे धक्के मार कर अपने लोक से नीचे फिकवा देता है. इसी बिंदु पर आकर उपन्यास की इति हो जाती है. यह उपन्यास सिर्फ चौबीस घंटे की घटनाओं पर आधारित होने के कारण मनश्चेतन प्रवाह शैली में लिखा गया है. उपन्यास शिक्षा देता है कि नफरत न तो भूलोक में रहने देती है और न किसी और लोक में |

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