India Nepal relations: नेपाल दूतावास में हर्बल गार्डन का शुभारम्भ हुआ, भारत-नेपाल संबंधों को मिली नई हरित दिशा
नई दिल्ली (रविंद्र कुमार): हिन्दू नववर्ष के पावन अवसर पर राजधानी स्थित नेपाल दूतावास एक विशेष आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय संदेश का साक्षी बना, जब यहां हर्बल गार्डन का विधिवत शुभारंभ किया गया। यह पहल केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत और नेपाल के बीच साझा सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और प्रकृति के प्रति सम्मान का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी। उद्घाटन समारोह में भारत में नेपाल के राजदूत महामहिम डॉ. शंकर प्रसाद शर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रही, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में आयुष मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेश कुमार दाधीच ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। दोनों गणमान्य अतिथियों ने इस पहल को भारत-नेपाल संबंधों में एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम बताया।

इस अवसर पर ग्लोबल ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (इंडिया) के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता, वर्ल्ड एनवायरनमेंट काउंसिल के प्रो. गणेश चन्ना, योगगुरु मोहन कार्की सहित अनेक प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया। विभिन्न क्षेत्रों से आए राजनयिकों, अधिकारियों और विद्वानों की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि हर्बल और आयुर्वेदिक परंपराएं आज भी वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक और प्रभावशाली हैं। नवस्थापित हर्बल गार्डन का उद्देश्य केवल औषधीय पौधों का संरक्षण नहीं, बल्कि आमजन में आयुर्वेद, प्राकृतिक उपचार पद्धतियों और समग्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना भी है। यह पहल भारत और नेपाल की उस प्राचीन ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास है, जिसमें प्रकृति और मानव के बीच संतुलन को सर्वोपरि माना गया है। साथ ही, यह पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। कार्यक्रम के दौरान महर्षि वशिष्ठ गौशाला प्रबंधन एवं अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष संजय वशिष्ठ ने राजदूत डॉ. शर्मा को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया।

उन्होंने पवित्र गौ संरक्षण, वैज्ञानिक प्रबंधन और अनुसंधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों—एक नई दिल्ली और दूसरा काठमांडू में—आयोजित करने की पहल रखी। इस प्रस्ताव को दोनों देशों के बीच सहयोग के एक नए आयाम के रूप में देखा जा रहा है, जो पारंपरिक पशुधन संरक्षण और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण को एक साथ जोड़ने का कार्य करेगा। समारोह का समापन सकारात्मक ऊर्जा, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक एकता के संदेश के साथ हुआ। हर्बल चिकित्सा, पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प लेते हुए भारत और नेपाल ने एक बार फिर यह साबित किया कि उनकी मित्रता केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई है।



