Indonesia Mine Collapse: इंडोनेशिया की पत्थर खदान हादसे में 19 लोगों की मौत, लापता लोगों की तलाश जारी
इंडोनेशिया के वेस्ट जावा प्रांत में शुक्रवार को एक दर्दनाक हादसा सामने आया जब सीरेबोन जिले में स्थित गुनुंग कुडा नाम की एक चूना पत्थर की खदान अचानक धंस गई। इस हादसे में अब तक कम से कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग अब भी मलबे के नीचे फंसे हुए बताए जा रहे हैं। हादसे के समय खदान में काम कर रहे श्रमिक अचानक गिरी चट्टानों की चपेट में आकर दब गए। यह घटना पूरे देश को झकझोर देने वाली बन गई है।
स्थानीय पुलिस प्रमुख सुमार्नी ने बताया कि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन इलाके की भौगोलिक स्थिति, ऊबड़-खाबड़ ज़मीन और लगातार खराब मौसम के चलते रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतें आ रही हैं। शनिवार दोपहर तक कुल 16 शवों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका था, जबकि एक गंभीर रूप से घायल व्यक्ति ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। रेस्क्यू टीमें और स्थानीय वॉलंटियर्स अब भी जान जोखिम में डालकर बचे हुए लोगों को तलाशने में लगे हुए हैं। इस काम में पांच बड़ी खुदाई मशीनों की मदद ली जा रही है।
टीवी चैनलों पर प्रसारित फुटेज में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी, सेना के जवान और स्थानीय बचाव दल मिलकर चट्टानों के बीच फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। घटनास्थल पर अराजकता का माहौल है, जहां हर क्षण जीवन और मृत्यु के बीच जंग चल रही है।
फिलहाल हादसे के कारणों की पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन शुरुआती जांच में खदान में भारी लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी की बात सामने आई है। पुलिस ने खदान के मालिक समेत छह लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। वेस्ट जावा के गवर्नर डेदी मुल्यादी ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए बताया कि फरवरी में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने इस खदान का दौरा किया था और उसे खतरनाक घोषित किया था। हालांकि, उस समय उनके पास इसे बंद कराने का अधिकार नहीं था। अब उन्होंने गुनुंग कुडा समेत प्रदेश की चार अन्य खतरनाक खदानों को बंद करने का आदेश दे दिया है।
इस हादसे ने इंडोनेशिया में खनन सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश में अवैध और असंगठित खनन प्रथाएं आम हैं, जो न केवल श्रमिकों की जान को खतरे में डालती हैं, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी नुकसान पहुंचाती हैं। इन खदानों में सुरक्षा उपकरणों का अभाव होता है और खतरनाक केमिकल जैसे मरकरी और सायनाइड का प्रयोग श्रमिकों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
गौरतलब है कि पिछले साल भी सुमात्रा द्वीप पर भारी बारिश के चलते एक अवैध सोने की खदान में भूस्खलन हो गया था, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई थी। इस बार फिर एक ऐसा ही हादसा सामने आया है, जिसने न केवल प्रशासन को, बल्कि पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक ये खतरनाक खदानें लोगों की जान लेती रहेंगी।
सरकार ने राहत कार्यों को और तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए बचावकर्मियों को अतिरिक्त उपकरण और संसाधन भेजे गए हैं। पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की भी बात कही जा रही है। लेकिन असल सवाल यह है कि क्या इस हादसे के बाद इंडोनेशिया में खनन क्षेत्र में सुधार लाया जाएगा या फिर यह एक और दुखद अध्याय बनकर रह जाएगा?



