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Sonam Wangchuk: ‘सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाएं’, जंतर-मंतर पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

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Sonam Wangchuk: ‘सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाएं’, जंतर-मंतर पहुंचे अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जंतर-मंतर पहुंचकर शिक्षा व्यवस्था को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक का समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ियों के बावजूद सरकार कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार वास्तव में शिक्षा व्यवस्था में सुधार चाहती है तो सोनम वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बना देना चाहिए।

जंतर-मंतर पर मीडिया से बातचीत करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश में एक के बाद एक प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय उन्हें नजरअंदाज कर रही है।

केजरीवाल ने कहा कि नीट परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद कई छात्रों ने आत्महत्या जैसा गंभीर कदम उठाया, लेकिन सरकार युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं कर सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद भी कई अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं, जबकि सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली पर भी सवाल खड़े हुए। उनके अनुसार, जिन एजेंसियों पर आरोप लगे, उनके खिलाफ भी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से लेने के बजाय अहंकार में डूबी हुई है। केजरीवाल ने कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए, क्योंकि यदि उनकी चिंताओं की अनदेखी जारी रही तो आने वाले समय में यही युवा लोकतांत्रिक तरीके से अपना फैसला सुनाएंगे।

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक और व्यापक बदलाव लाना है तो सोनम वांगचुक जैसे शिक्षा सुधारक को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि ऐसा होने पर शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार संभव हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सरकार ऐसा कदम उठाएगी।

अपने संबोधन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने वर्ष 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसी जंतर-मंतर पर 4 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे ने आंदोलन शुरू किया था और कुछ वर्षों बाद तत्कालीन सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। केजरीवाल ने दावा किया कि इतिहास खुद को दोहरा सकता है और यदि वर्तमान सरकार भी युवाओं की आवाज नहीं सुनेगी तो उसे भी राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के समर्थन में विभिन्न संगठनों और लोगों की मौजूदगी के बीच केजरीवाल ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भरोसा बनाए रखने के लिए सरकार को जवाबदेह और संवेदनशील रवैया अपनाना होगा।

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