Yamuna Pollution: सफाई के नाम पर भारी नौटंकी, यमुना आज भी मैली – विपिन शर्मा
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर। दिल्ली में यमुना नदी की सफाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस के पूर्व विधायक विपिन शर्मा ने दिल्ली सरकार के ‘चलो यमुना’ अभियान पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सफाई के नाम पर कई दिनों तक अभियान चलाया गया, तस्वीरें साझा की गईं, लेकिन नदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री, सांसद, विधायक और पार्टी कार्यकर्ता तक अभियान में शामिल हुए तथा सोशल मीडिया पर यमुना के तटों की सफाई की तस्वीरें साझा की गईं, लेकिन इसके बावजूद यमुना के प्रदूषण की समस्या बनी हुई है।
विपिन शर्मा ने भाजपा सांसद मनोज तिवारी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने यमुना के पानी में उतरकर आचमन किया था और दावा किया था कि नदी का पानी साफ हो रहा है। कांग्रेस नेता ने इस घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल तस्वीरें खिंचवाने या प्रतीकात्मक गतिविधियों से यमुना को प्रदूषण मुक्त नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी लंबे समय तक यमुना की सफाई को लेकर दावे करते रहे थे। शर्मा के अनुसार, अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार पर भी यमुना की सफाई के दावों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ये आरोप विपिन शर्मा ने सरकार की प्रदूषण नियंत्रण संबंधी कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए लगाए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि दिल्ली में कालिंदी कुंज के पास यमुना नदी में एक बार फिर सफेद झाग दिखाई देने की समस्या सामने आ रही है। छठ पूजा से पहले झाग हटाने के लिए रसायनों के छिड़काव की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यमुना में झाग बनने की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। विशेष रूप से सर्दियों की शुरुआत में ओखला बैराज और कालिंदी कुंज के आसपास नदी की सतह पर झाग की मोटी परत दिखाई देने लगती है। इससे नदी के प्रदूषण और उसकी सफाई के लिए अपनाए जा रहे उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं।
विपिन शर्मा ने कहा कि झाग हटाने के लिए पहले भी कई बार रसायनों का इस्तेमाल किया गया है। उनके अनुसार, इससे कुछ समय के लिए झाग कम हो सकता है, लेकिन समस्या दोबारा सामने आ जाती है, क्योंकि झाग पैदा करने वाले प्रदूषक नदी में पहुंचते रहते हैं। उन्होंने कहा कि केवल नदी की सतह पर दिखाई देने वाले झाग को हटाना पर्याप्त नहीं है। प्रदूषण के मूल कारणों को दूर करना और गंदे पानी को नदी में जाने से रोकना जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि यमुना की सफाई के लिए प्रचार और प्रतीकात्मक अभियानों के बजाय ठोस उपायों पर ध्यान दिया जाए।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि दिल्ली में घरों और औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला दूषित पानी लंबे समय से यमुना को प्रदूषित कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल रसायनों के छिड़काव से झाग हटाने पर नदी का पानी भी स्वच्छ हो जाएगा, या इसके लिए प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नदी में गंदे पानी का प्रवाह रोकने, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है।
विपिन शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि यमुना में प्लास्टिक और अन्य कचरा डालने की घटनाएं जारी हैं, लेकिन इन्हें रोकने के लिए पर्याप्त प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा कि साल में एक-दो बार नदी के किनारों पर सफाई अभियान चलाकर तस्वीरें साझा करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। उनके अनुसार, यमुना को साफ करने के लिए लगातार निगरानी, गंदे पानी के उचित शोधन और कचरा नदी में जाने से रोकने जैसे कदम जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि जब तक प्रदूषण के कारणों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक सफाई के दावों के बावजूद नदी की स्थिति में स्थायी सुधार लाना मुश्किल होगा।
छठ महापर्व नजदीक आने का उल्लेख करते हुए विपिन शर्मा ने चिंता जताई कि यदि यमुना के पानी की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो श्रद्धालुओं को पूजा के दौरान प्रदूषित पानी में खड़े होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि छठ पूजा में श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं, इसलिए नदी के घाटों की स्वच्छता और पानी की गुणवत्ता महत्वपूर्ण है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पर्व से पहले केवल झाग हटाने तक सीमित न रहा जाए, बल्कि नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
विपिन शर्मा ने अंत में सवाल उठाया कि यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावों के बावजूद नदी की समस्या वर्षों से क्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस सवाल का जवाब देना चाहिए और जनता को यह बताना चाहिए कि नदी में प्रदूषण रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, यमुना की वास्तविक सफाई के लिए निरंतर प्रयास, प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।





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