Delhi water supply: “वॉटर रेशनलाइजेशन प्रोजेक्ट” दिल्ली सरकार का जनहित में ऐतिहासिक कदम : दीपक गाबा
नई दिल्ली, ( रविंद्र कुमार )। दिल्ली सरकार द्वारा राजधानी की जल वितरण व्यवस्था को आधुनिक और संतुलित बनाने के लिए शुरू किए गए “वॉटर रेशनलाइजेशन प्रोजेक्ट” का विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों ने स्वागत किया है। भाजपा शाहदरा जिला अध्यक्ष दीपक गाबा ने इसे दिल्ली के जल प्रबंधन इतिहास का एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा कि वर्षों से राजधानी के कई क्षेत्रों में असमान जल आपूर्ति, पुरानी पाइपलाइन और जल हानि जैसी समस्याएं बनी हुई थीं। ऐसे में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के नेतृत्व में शुरू किया गया यह व्यापक सुधार अभियान न केवल जल वितरण में संतुलन स्थापित करेगा, बल्कि भविष्य की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। दीपक गाबा ने कहा कि दिल्ली में वर्षों से कुछ क्षेत्रों में पानी की कमी और कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक जल आपूर्ति की समस्या बनी हुई है। सरकार द्वारा शुरू की गई यह परियोजना जल वितरण व्यवस्था में मौजूद असंतुलन को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन ही भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसी सोच के साथ यह योजना लागू की जा रही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में गर्मियों के दौरान प्रतिदिन लगभग 1,250 एमजीडी पानी की आवश्यकता होती है, जबकि सीमित संसाधनों और यमुना में जलस्तर की चुनौतियों के कारण उत्पादन पर दबाव बना रहता है। हाल ही में जल उत्पादन में लगभग 100 एमजीडी की कमी दर्ज की गई है, जिससे कुछ क्षेत्रों में जलापूर्ति प्रभावित हुई। ऐसे समय में जल के न्यायसंगत और समान वितरण की दिशा में उठाया गया यह कदम अत्यंत सराहनीय है। दीपक गाबा ने कहा कि दिल्ली के लगभग 12 से 13 विधानसभा क्षेत्रों में हर वर्ष गर्मियों के दौरान सबसे अधिक जल संकट की शिकायतें सामने आती हैं। वॉटर रेशनलाइजेशन प्रोजेक्ट के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि राजधानी के प्रत्येक नागरिक को उसके क्षेत्र की परवाह किए बिना समान और पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि दिल्ली के 16,634 किलोमीटर लंबे जल वितरण नेटवर्क में से लगभग 5,500 किलोमीटर पाइप लाइन 30 वर्ष से अधिक पुरानी हैं। पुरानी पाइपलाइनों में रिसाव और जल प्रदूषण की संभावना अधिक रहती है, जिससे बड़ी मात्रा में शोधित पानी उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही व्यर्थ हो जाता है। ऐसे में पाइपलाइन नेटवर्क का आधुनिकीकरण और ड्यूल पाइपिंग सिस्टम जैसी योजनाएं जल संरक्षण और बेहतर आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी |



