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दिल्ली में फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन…संचालक को नहीं है छात्रों की चिंता

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दिल्ली में फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन…कोचिंग संचालक को नहीं है छात्रों की चिंता

दमकल विभाग के आंकड़े बताते है कि 2022-23 में 17043 आग की घटना को लेकर फोन कॉल आए. इस दौरान 95 लोगों की मौत हुई है जबकि 749 लोग घायल हुए.

दिल्ली के मुखर्जी नगर में 15 जून को डीडीए के एक कमर्शियल इमारत में आग लग गई. इस घटना में दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 69 छात्र घायल हुए. जिसमें से तीन छात्र अभी भी तीन अलग-अलग अस्पताल में भर्ती है, जहां उनका इलाज चल रहा है.इस हादसे के बाद मुखर्जी नगर में चल रहे कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के हालात का जायजा लिया. जिस बिल्डिंग में आग लगी वहां फायर सेफ्टी नॉर्म का पालन नहीं किया जा रहा था. नियमों का उल्लंघन सिर्फ इस बिल्डिंग में नहीं है. मुखर्जीनगर में ढेरों ऐसी इमारतें है, जहां सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है. डीडीए द्वारा बनाए गए ज्यादातर इमारतों में संकरी सीढ़ियां, सीढ़ियों के दीवारों पर लगे बिजली के मीटर और खराब पड़े अग्निशामक यंत्र है.

इन सभी के पास एनओसी नहीं है. दिल्ली फायर सर्विसेज के निदेशक अतुल गर्ग कहते हैं, “हर इमारत को एनओसी की जरूरत नहीं होती है. अभी तक हमने दिल्ली में किसी भी कोचिंग इंस्टीट्यूट को फायर एनओसी नहीं दिया है, क्योंकि उन्हें दिल्ली फायर सर्विस एक्ट में नहीं जोड़ा गया है.”

आग की घटना के बाद हमने पाया कि मुखर्जी नगर में जितने इमारतों में कोचिंग इंस्टीट्यूट चल रहे है, वो इमारत सुरक्षा की दृष्टि से छात्रों के लिए सुरक्षित नहीं हैं. हादसे के बाद वहां इमारतों, खासकर खिड़कियों पर लगे इंस्टीट्यूट्स के पोस्टर्स को हटा दिया गया है.

यूपीएससी की तैयारी कर रहे 24 वर्षीय मोहित कुमार कहते हैं, “जिन इमारतों में कोचिंग चल रहे हैं उनकी हालत जर्जर है. अगर इंस्टीट्यूट इतनी फीस ले रहे हैं तो इस तरह के हादसों में उनकी जिम्मेदारी भी बननी चाहिए.”

दिल्ली में नियम ना होने का फायद उठाते कोचिंग इंस्टीट्यूट

दिल्ली में कोचिंग इंस्टीट्यूट को चलाने के लिए दमकल विभाग से एनओसी को लेकर कोई स्पष्ट नियम नहीं है. यह बात कोचिंग इंस्टीट्यूट भी बखूबी जानते है, इसलिए वह इसका फायदा उठाकर किसी भी बिल्डिंग में कोचिंग चलाते है. मुखर्जी नगर, कालू सराय, लक्ष्मीनगर और मुनिरका हर जगह कोचिंग संचालक छात्रों की सुरक्षा को लेकर बेखबर है.

दिल्ली दमकल विभाग ने साल 2021 में 2153 फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी किया था, जो साल 2022 में वह बढ़कर 2456 हो गया. अगर स्कूल कॉलेज की बात करें तो 2022 में 1363 स्कूल, 29 कॉलेज को एनओसी जारी किया.

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चार साल से मुखर्जीनगर इलाके में रह कर यूपीएससी की तैयारी कर रहे देवरत्न कहते हैं, “किसी भी बिल्डिंग में सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है. अगर होता है छात्र खिड़कियां तोड़कर बाहर क्यों निकलते?”

खराब स्थिति में बिजली के मीटर 

मुखर्जी नगर में 15 जून को लगी आग का मुख्य कारण बिजली के मीटर में ब्लास्ट होना था. चश्मदीद रूपेश जो आग का शिकार हुई इमारत के सामने किराना दुकान चलाते है. वह बताते हैं, “सुबह के करीब 11:50 मिनट पर आग शुरू हुई. मीटर में आग लगने से बहुत तेज आवाज आने लगी और कुछ ही देर में धुंआ फैल गया. आसपास के लोगों ने आग बुझाने के लिए फायर सिलेंडर का उपयोग किया लेकिन वह आग बुझाने में नाकाम रहे.”

इसी इलाके में पांच सालों से इलेक्ट्रीशियन का काम करने वाले विकास शुक्ला बताते हैं, “इस इलाके में मौजूद हर इमारत में बिजली के मीटर खराब हालात में है. सभी ने प्लाईवुड से इन मीटरों को ढक दिया जिससे की आग लगने का खतरा बढ़ गया है. कई इमारतों में मीटर 20 साल पुराने है. पुराने होने के वजह से इनमें आग लगने का खतरा बना रहता है क्योंकि कुछ लोड उठा पाते है और कुछ नहीं.”

हादसे के बाद से डर के कारण इलाके में कई कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद हो गए हैं और छात्र अपने घर चले गए हैं. जांच अधिकारी महेंद्र प्रताप बताते हैं कि हमें घायल बच्चों का बयान लेना है लेकिन वह अभी यहां नहीं है. उनसे संपर्क किया जा रहा है.

इसी बीच पुलिस ने 12 छात्रों और 4 स्टॉफ के बयान के आधार पर दो कोचिंग संचालकों को गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई है.

इलाके में कोचिंग इंस्टीट्यूट बंद है लेकिन वहां रहकर तैयारी करने वाले कई छात्र इस हादसे के बाद से प्रदर्शन कर रहे है. उनका कहना है कि छात्रों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.

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