Gujarat Drought: गुजरात के चार जिले सूखाग्रस्त घोषित, किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹8,500 की मदद, पशुपालकों के लिए भी राहत
अहमदाबाद। गुजरात में इस वर्ष कम बारिश के कारण किसानों और पशुपालकों के सामने पैदा हुए गंभीर जल संकट और सूखे के हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने चार प्रमुख जिलों को सूखाग्रस्त घोषित करने का अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार, 26 अक्टूबर को आधिकारिक घोषणा करते हुए जामनगर, देवभूमि द्वारका, पोरबंदर और कच्छ जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया। राज्य सरकार ने प्रभावित किसानों को सूखे के चलते हुए फसल नुकसान की भरपाई के लिए विशेष वित्तीय सहायता देने, पशुपालकों के लिए रियायती दर पर पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने तथा ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुरक्षित रखने के लिए रोजगार गारंटी देने की विस्तृत योजना पेश की है। यह संपूर्ण राहत पैकेज 1 नवंबर 2026 से प्रभावी रूप से लागू होगा और सूखा घोषित करने का यह आदेश अगले छह महीने की अवधि तक अमल में रहेगा।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के अनुसार, वर्तमान मानसून सीजन के दौरान समूचे गुजरात राज्य में औसत बारिश का करीब 89 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया है। राज्य के विभिन्न भौगोलिक हिस्सों में वर्षा का वितरण बेहद असमान रहा, जिसके चलते कुछ खास इलाकों में बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की गई। इसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव कृषि गतिविधियों, भूजल स्तर और स्थानीय जल संसाधनों की उपलब्धता पर पड़ा है। विशेष रूप से पश्चिमी गुजरात के देवभूमि द्वारका, कच्छ, जामनगर और पोरबंदर जिलों में बारिश की भारी कमी के कारण खरीफ फसलों के उत्पादन और सिंचाई को लेकर किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन के जमीनी सर्वेक्षण के उपरांत केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित वैज्ञानिक सूखा आकलन मानकों के आधार पर ही इन चार जिलों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने का कदम उठाया गया है।
सरकार की ओर से स्वीकृत व्यापक राहत पैकेज के तहत प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को हुए नुकसान की भरपाई राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के नियमों के अनुसार की जाएगी। इसके अंतर्गत पात्र किसानों को प्रति हेक्टेयर 8,500 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे प्रदान की जाएगी, जो अधिकतम दो हेक्टेयर की भूमि सीमा तक देय होगी। इस सहायता का प्राथमिक उद्देश्य अल्पवृष्टि और सूखे के थपेड़ों से बर्बाद हुई फसलों से जूझ रहे अन्नदाताओं को सीधी वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। राहत राशि के सीधे बैंक खातों में अंतरण (DBT) और पात्रता निर्धारण की शर्तें राज्य के राजस्व व आपदा प्रबंधन नियमों के अनुरूप तय की जा रही हैं, ताकि किसी भी जरूरतमंद किसान को मदद से वंचित न रहना पड़े।
कृषि के साथ-साथ सूखे का सीधा और घातक असर मवेशियों के चारे और पेयजल की उपलब्धता पर भी पड़ा है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने प्रभावित जिलों में रियायती दरों पर पशु चारा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर जारी रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य में अब तक करीब 1.21 करोड़ किलोग्राम सूखे चारे का वितरण जरूरतमंद क्षेत्रों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, आने वाले महीनों में किसी भी संभावित किल्लत से निपटने के लिए लगभग तीन करोड़ किलोग्राम चारे का बफर स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों को यह चारा मात्र दो रुपये प्रति किलोग्राम की अत्यधिक रियायती दर पर मुहैया कराया जाएगा, जिससे दुग्ध उत्पादकों पर आर्थिक बोझ न पड़े।
सूखा प्रभावित तालुकों में संचालित किए जाने वाले पशु राहत शिविरों (कैटल कैंप) में रखे जाने वाले मवेशियों के भरण-पोषण के लिए भी सरकार ने विशेष दैनिक भत्ते का प्रावधान किया है। इसके तहत पात्र पशुपालकों को प्रति पशु प्रतिदिन 80 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह विशेष अनुदान प्रारंभिक रूप से दो महीने की अवधि के लिए लागू किया गया है। प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि इन शिविरों में पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल, छायादार स्थान और नियमित स्वास्थ्य जांच की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि चारे या पानी के अभाव में एक भी मवेशी की जान न जाए।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और सूखे की मार झेल रहे परिवारों के पलायन को रोकने के लिए राहत पैकेज में रोजगार सृजन को अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है। चारों सूखा प्रभावित जिलों में ‘विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G के तहत पंजीकृत अकुशल श्रमिकों को 150 दिनों तक रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। यह विशेष व्यवस्था भी आगामी 1 नवंबर से धरातल पर उतरेगी। इसके माध्यम से ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण, चेकडैम निर्माण, तालाबों के गहरीकरण और अन्य सामुदायिक कार्यों में रोजगार देकर अतिरिक्त आय के स्रोत मुहैया कराए जाएंगे।
इसके साथ ही राज्य सरकार आगामी रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए सिंचाई और पेयजल आपूर्ति की सघन समीक्षा कर रही है। जल स्तर में आई गिरावट को देखते हुए नर्मदा कमांड क्षेत्र और स्थानीय बड़े व मध्यम बांधों से रबी फसलों की बुवाई के लिए पानी छोड़ने की रणनीतिक योजना तैयार की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पहली प्राथमिकता स्थानीय नागरिकों के लिए स्वच्छ पेयजल की निरंतर आपूर्ति बनाए रखना है, जिसके बाद ही सिंचाई और पशुओं की जरूरतों के लिए जल आवंटित किया जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने दोहराया कि संकट के इस दौर में किसानों, मजदूरों और पशुपालकों के हितों की रक्षा करना सरकार का सर्वोच्च दायित्व है।





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