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France Protests: फ्रांस में बजट विरोध प्रदर्शन: सड़कों पर उतरे 1 लाख लोग, आगजनी और झड़पें

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France Protests: फ्रांस में बजट विरोध प्रदर्शन: सड़कों पर उतरे 1 लाख लोग, आगजनी और झड़पें

नेपाल के बाद अब फ्रांस में भी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। देशभर में बजट कटौती और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा तेजी से बढ़ रहा है। बुधवार को लगभग एक लाख से अधिक प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और उन्होंने सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। विरोध प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। कई जगह तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं।

सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए देशभर में 80 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए हैं। अब तक कम से कम 200 उपद्रवी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पेरिस में विशेष रूप से हालात तनावपूर्ण रहे, जहां एक स्कूल के पास कूड़ेदान जला कर सड़क को अवरुद्ध कर दिया गया। दमकल कर्मियों ने समय रहते आग पर काबू पाया और सड़क को फिर से खोल दिया।

फ्रांस में बजट हमेशा राजनीतिक विवाद का कारण रहा है। हर साल बजट से तय होता है कि सरकार किन क्षेत्रों पर खर्च बढ़ाएगी और किन क्षेत्रों में कटौती करेगी। यही वित्तीय नीतियां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव की जड़ बनती हैं। पिछले साल भी 2025 में इसी तरह का विवाद हुआ था, जब प्रधानमंत्री मिशेल बार्नियर ने संसद में बजट पेश किया। बजट में सामाजिक कल्याण योजनाओं में कटौती को लेकर वामपंथी दलों ने विरोध किया, जबकि दक्षिणपंथी दलों ने इसे कर और वित्तीय नीतियों पर चोट मानते हुए आलोचना की।

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू राजनीति में असामान्य रूप से, इन विरोधी गुटों ने इस बार सरकार के खिलाफ एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। दिसंबर 2025 में हुए मतदान में बार्नियर सरकार अल्पमत में आ गई और अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया, जिससे उनकी सरकार गिर गई और राष्ट्रपति को नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा।

पेरिस में अब तक हुए विरोध प्रदर्शन में 132 लोग गिरफ्तार हुए हैं। पूरे देश में कुल 200 से अधिक उपद्रवी पकड़े गए हैं। प्रदर्शनकारी यूनियन सीजीटी का कहना है कि असली समस्या राष्ट्रपति मैक्रों और उनके काम करने के तरीके में है और जब तक उनकी विदाई नहीं होगी, प्रदर्शन जारी रहेगा।

पूर्व प्रधानमंत्री बायरू ने जुलाई 2026 में साल 2026 के लिए बजट फ्रेमवर्क पेश किया था, जिसमें लगभग 44 अरब यूरो (करीब 4 लाख करोड़ रुपए) की बचत योजना शामिल थी। उनका कहना था कि देश का कर्ज अब GDP का 113% हो गया है और इसे नियंत्रित करना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि सरकार ने खर्चों में कटौती नहीं की और टैक्स तथा राजस्व सुधार नहीं किए तो आने वाले वर्षों में फ्रांस की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।

हालांकि, इस बजट के प्रस्ताव पर व्यापक विवाद हुआ। वामपंथी दलों और मजदूर यूनियनों का कहना है कि यह आम लोगों की जेब पर असर डालेगा और सामाजिक कल्याण योजनाओं में कटौती होगी। इसी वजह से विरोध प्रदर्शन और भी तेज हो गए। संसद में हुए विश्वास मत में बायरू सरकार हार गई और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को नया प्रधानमंत्री नियुक्त करना पड़ा।

फ्रांस के वर्तमान विरोध प्रदर्शन ने देश में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ा दिया है। लोगों का गुस्सा बजट कटौती और आर्थिक नीतियों के खिलाफ है। आगजनी और हिंसक झड़पों के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़कों पर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं और सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

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