फुटपाथ जनता के लिए हैं, भ्रष्टाचार की कमाई के लिए नहीं : मोहिनी जीनवाल
नई दिल्ली, (रविंद्र कुमार) : सुप्रीम कोर्ट द्वारा देशभर में पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित और अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ सुनिश्चित करने को लेकर दिए गए निर्देशों का स्वागत करते हुए सुंदर नगरी की निगम पार्षद मोहिनी जीनवाल ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी में फुटपाथों की बदहाल स्थिति केवल अतिक्रमण की समस्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे भ्रष्टाचार और कथित मिलीभगत का पूरा तंत्र काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि निगम वास्तव में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करना चाहता है तो सबसे पहले अतिक्रमण के संरक्षण में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करनी होगी। मोहिनी जीनवाल ने कहा कि दिल्ली के फुटपाथ आम जनता के लिए बनाए गए हैं, लेकिन यमुनापार के अनेक इलाकों में पैदल यात्रियों के हिस्से की जगह पर दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी और अवैध बाजारों का कब्जा है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और दिव्यांग सड़क पर वाहनों के बीच चलने को मजबूर हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि लोनी रोड, मंडोली रोड, भजनपुरा, कृष्णा नगर और सुंदर नगरी सहित यमुनापार के कई इलाकों में फुटपाथों पर अतिक्रमण की स्थिति गंभीर है। कहीं दुकानदारों ने अपना सामान फुटपाथ तक फैला रखा है तो कहीं रेहड़ी-पटरी और अवैध पटरी बाजारों ने पैदल चलने की जगह घेर रखी है। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ समय बाद फिर वही स्थिति दिखाई देने लगती है। इससे स्पष्ट है कि केवल अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं, बल्कि दोबारा कब्जा कराने वाले तंत्र पर भी कार्रवाई आवश्यक है। मोहिनी जीनवाल ने निगम व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि अतिक्रमण लगातार वापस आ रहा है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र में फुटपाथ पर बार-बार कब्जा होने के बावजूद यदि संबंधित अधिकारी कार्रवाई नहीं करते तो उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने निगम प्रशासन से मांग की कि अतिक्रमण के पीछे होने वाले कथित भ्रष्टाचार और अवैध वसूली की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।उन्होंने कहा कि रेहड़ी-पटरी वालों की रोजी-रोटी का सवाल अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके लिए कानून के अनुसार निर्धारित वेंडिंग जोन बनाए जाने चाहिए। सार्वजनिक फुटपाथ को अवैध वसूली या किसी की निजी दुकान का विस्तार बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि गरीबों की रोजी-रोटी के नाम पर अवैध कब्जे को संरक्षण देना भी गलत है और फुटपाथ खाली कराने के नाम पर किसी गरीब को परेशान करना भी उचित नहीं है। व्यवस्था कानून के मुताबिक और पारदर्शी होनी चाहिए। मोहिनी जीनवाल ने कहा कि समस्या केवल बाजारों तक सीमित नहीं है। जीटीबी अस्पताल सहित यमुनापार के कई प्रमुख अस्पतालों के बाहर भी फुटपाथ अतिक्रमण की चपेट में हैं। अस्पतालों के बाहर मरीजों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की आवाजाही अधिक होती है। ऐसे संवेदनशील स्थानों पर फुटपाथ पर कब्जा होना बेहद गंभीर विषय है और वहां तत्काल विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने सरकार और नगर निगम के सामने स्पष्ट जिम्मेदारी रख दी है। अब दिल्ली में केवल कागजी आदेश और औपचारिक अतिक्रमण हटाओ अभियान नहीं चलना चाहिए, बल्कि फुटपाथों को स्थायी रूप से पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।



