जलभराव रोकने के इंतजाम करने में पूरी तरह से नाकाम रही है ट्रिपल इंजन सरकार : भीष्म शर्मा
* आप पार्टी सरकार नें नहीं उठाया कोई कदम *
करना होगा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित
नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : अगली बरसात में दिल्ली में जलभराव देखने को नहीं मिलेगा ,यह जुमला हर बार हुए जलभराव के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा सिंचाई एवं बाढ़ नियन्त्रण विभाग के मंत्री प्रवेश वर्मा नें गढ़ा लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात | यह कहना है वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व विधायक भीष्म शर्मा का | भीष्म शर्मा कहते हैं जुमलों से जलभराव नहीं रुकने वाला इसे रोकने के लिए ट्रिपल इंजन सरकार को जमीन पर उतर कर काम करना होगा | नालों की सफाई कार्य से होने वाले भ्रस्टाचार को खत्म करना होगा ,सरकार को सफाई के कार्यों की खुद निगरानी उसी तरह करनी पड़ेगी जिस तरह से कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री और मंत्री किया करते |
केवल अफसरशाही के भरोसे काम नहीं हुआ करते | भीष्म शर्मा कहते हैं इस साल मॉनसून की बारिश दिल्ली वालों पर आफत बन गई है। इस बार दिल्ली वालों को अभूतपूर्व जलभराव की समस्या से जूझना पड़ा है और इसकी मूल वजह नालों और सीवरेज की सफाई न होना है। इसकी वजह ये है कि आबादी की जरुरतों के अनुरूप सीवरेज इंफ्रॉस्ट्रक्चर,का डिवेलप न होना है। 48 साल पहले 40 लाख आबादी थी जो अब ढाई करोड़ के करीब पहुंच चुकी है | यानी दिल्ली में जलभराव और सीवेज समस्या दूर करने के लिए जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया गया था, उस पर अब पांच गुना से भी अधिक भार है। इसी के चलते दिल्ली के तमाम लोग जलभराव और सीवर जाम की समस्या से जूझ रहे हैं। ढाई करोड़ आबादी को इस समस्या से राहत के लिए सरकारी एजेंसियों ने जो सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया, वह नाकाफी है | अपने 11 साल के शासन में आम आदमी पार्टी की सरकार नें इस ओर कोई कदम नहीं उठाये और न ही अब ट्रिपल इंजन की सरकार इस समस्या को समझ पा रही है | भीष्म शर्मा कहते हैं करीब पचास प्रतिशत अर्बन एरिया में सेंट्रलाइज्ड सीवर सिस्टम तो है, लेकिन बाकी इलाकों में अभी भी सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया है और जब तक यह कार्य नहीं होगा दिल्ली जलभराव झेलती ही रहेगी |
भीष्म शर्मा कहते हैं दिल्ली के रिहायशी, कमर्शियल, इंडस्ट्रियल व इंस्टीट्यूशनल इलाकों में जो सीवेज वाटर जनरेट होता है, उसके निकासी के लिए जो सीवरेज इंफ्रास्ट्रक्चर है, वह पर्याप्त नहीं हैं । सीवेज वाटर की निकासी के लिए जल बोर्ड को जो सबसे बड़ा ट्रंक लाइन है, उसकी लंबाई करीब 204.93 किमी है। साल 2023 से पहले ट्रंक लाइन की कभी सफाई ही नहीं की गई थी। हाई लेवल कमिटी बनी, तब इस बड़े ट्रंक लाइन की सफाई शुरु की गई। अब तक 70-72 किमी तक ही ट्रंक लाइन की सफाई हुई है।
1000 एमएम से छोटा ट्रंक लाइन की लंबाई 529.5 किमी है। इस सीवेज लाइन की भी कभी सफाई नहीं की गई थी। एलजी के आदेश पर सफाई शुरु हुई। अबतक, 240-42 किमी तक सफाई हो पाई है। इंटरनल ट्रंक लाइन की कुल लंबाई करीब 9740 किमी है। यही वह ट्रंक लाइन है, एक -एक घर से सीवेज वॉटर कैरी कर बड़े ट्रंक लाइन में लाती है। इसकी भी सफाई कम ही होती है, जिससे आए दिन सीवर जाम की समस्या होती है। भीष्म शर्मा कहते हैं केवल जुमलों से काम नहीं होने वाला इसके लिए भूगोल को समझना होगा ,समस्या के निदान के लिए एक्सपर्ट्स को जिम्मेदारी सौंपनी होगी ना कि भ्रष्ट अभियंताओं की रिपोर्ट पर काम करना होगा बल्कि जमीन पर उयत समस्या का समाधान करना होगा |



