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आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को नये साल का गिफ्ट दिया सरकार ने : दीपक गाबा

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दीपक गाबा
आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को नये साल का गिफ्ट दिया सरकार ने : दीपक गाबा

आर्थिक रूप से कमजोर लोगो को नये साल का गिफ्ट दिया सरकार ने : दीपक गाबा

लाखों लोगो को मिलेगा इसका फायदा

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : दिल्ली की ट्रिपल इंजन सरकार दिल्ली की जनता को लगातार नये साल के तोहफे देती जा रही है जिनसे दिल्ली के लाखों लोग लाभान्वित होंगे | यह कहना है भारतीय जनता पार्टी शाहदरा जिए के अध्यक्ष दीप गाबा का | दीपक गाबा कहते हैं गत दिनों रेखा गुप्ता सरकार नें जरुरतमन्द लोगो के लिए अटल कैंटीन का तोहफा दिया जिसके तहत मात्र पांच रुपये में भोजन की व्यवस्था की गई है और अब दिल्ली के लोगो को दिल्ली सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लू ) कैटेगरी के तहत मुफ्त इलाज के हकदार मरीजों के लिए सालाना इनकम की लिमिट बढ़ा दी है।

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए पहले यह लिमिट 2.2 लाख रुपये थी। सरकार ने अब इसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। दिल्ली सरकार के इस फैसले से मुफ्त हेल्थकेयर तक पहुंच बढ़ जाएगी। जारी किया गया यह बदलाव राजधानी के सभी पहचाने गए प्राइवेट अस्पतालों में मुफ्त इलाज चाहने वाले सभी योग्य मरीजों पर लागू होगा | दीपक गाबा कहते हैं इनकम लिमिट में यह बढ़ोतरी इसे प्राइवेट स्कूलों में ईडब्ल्यूएस एडमिशन के लिए लागू लिमिट के बराबर लाती है। मौजूदा आर्थिक हालात में पहले की लिमिट को नाकाफी पाया गया था। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय ने अस्पताल अधिकारियों को संशोधित लिमिट का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।

सरकारी आदेश में कहा गया है कि किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से देखा जाएगा। आदेश के अनुसार, यह बढ़ोतरी मेडिकल इनकम लिमिट को दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के लिए ईडब्ल्यूएस पहले से लागू क्राइटेरिया के बराबर करती है, जैसा कि कोर्ट ने पहले कहा था। मौजूदा आर्थिक हालात में पहले की लिमिट अपर्याप्त पाई गई थी। दीपक गाबा कहते हैं मौजूदा नियमों के तहत, दिल्ली के जिन प्राइवेट अस्पतालों को रियायती दरों पर सरकारी ज़मीन दी गई है, उन्हें ऐसे मरीज़ों को मुफ्त इलाज देना ज़रूरी है, जो सिर्फ़ शहर ही नहीं, बल्कि देश के किसी भी हिस्से से आ सकते हैं। डीजीएचएस ने पहचाने गए अस्पतालों के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे संशोधित इनकम लिमिट का सख्ती से पालन करें।

आदेश में कहा गया है कि किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। नोटिफिकेशन में हाई कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, मरीज़ों के मुफ्त इलाज की लगातार निगरानी की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। इसमें एक मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा समय-समय पर समीक्षा भी शामिल है।

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