Ghaziabad Encounter: गाजियाबाद एनकाउंटर में शहीद सिपाही सौरभ देशवाल की वीरता की पूरी कहानी
गाजियाबाद के नाहल गांव में एक साहसिक पुलिस कार्रवाई के दौरान अपनी जान की बाजी लगाकर देश के लिए शहीद हुए नोएडा पुलिस के कांस्टेबल सौरभ देशवाल की बहादुरी आज हर तरफ चर्चा में है। मंगलवार रात करीब 10:30 बजे नोएडा पुलिस की एक टीम कुख्यात हिस्ट्रीशीटर कादिर को गिरफ्तार करने पहुंची थी। पुलिस ने कादिर को धर दबोचा और उसे लेकर वापस लौट रही थी कि अचानक गांव के पंचायत भवन के पीछे घात लगाकर बैठे बदमाशों ने पुलिस पार्टी पर पथराव शुरू कर दिया। स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि पुलिसकर्मी अपनी सुरक्षा के लिए तितर-बितर हो गए। मगर कांस्टेबल सौरभ देशवाल डटे रहे और अकेले ही मोर्चा संभाल लिया।
दर्जन भर बदमाशों से अकेले लोहा लेते हुए सौरभ ने अदम्य साहस दिखाया, लेकिन इसी बीच अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी और एक गोली सौरभ के सिर में लग गई। वह मौके पर ही गिर पड़े। साथी पुलिसकर्मी उन्हें तुरंत गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जैसे ही यह खबर नोएडा और गाजियाबाद पुलिस मुख्यालयों तक पहुंची, महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। तत्काल गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर ने डीसीपी ग्रामीण की निगरानी में एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम ने तड़के तक ही कादिर को एक बार फिर से मुठभेड़ के दौरान घायल कर गिरफ्तार कर लिया।
सौरभ देशवाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले के बधेव गांव के निवासी थे। वे बचपन से ही पुलिस में भर्ती होना चाहते थे और लगातार प्रयासों के बाद 2016 में उत्तर प्रदेश पुलिस में उनकी भर्ती हुई। अपनी बहादुरी और तेजतर्रार स्वभाव के कारण उन्हें अधिकतर समय स्पेशल स्टाफ में तैनाती मिली। वर्तमान में वह नोएडा के फेज-3 थाने में तैनात थे। अपने नौ साल के छोटे लेकिन प्रभावशाली करियर में उन्होंने दर्जनों बदमाशों को सलाखों के पीछे भेजा।
मुठभेड़ से चंद मिनट पहले सौरभ ने अपनी पत्नी से फोन पर बात की थी। खाने-पीने की सामान्य बातचीत के बाद उन्होंने कहा था कि अब ड्यूटी पर जा रहा हूं। यह उनकी पत्नी के साथ आखिरी बातचीत थी, जिसे याद कर वह बार-बार बेसुध हो रही हैं और यही कह रही हैं, “मुझे क्या पता था कि यह आखिरी बार है जब सौरभ की आवाज सुनूंगी।”
इस पूरे अभियान में एक और चौंकाने वाली बात यह रही कि नोएडा पुलिस की टीम कादिर की गिरफ्तारी के लिए सादी वर्दी में गांव पहुंची थी और उन्होंने गाजियाबाद पुलिस को इस ऑपरेशन की पूर्व जानकारी नहीं दी थी। गाजियाबाद पुलिस को इस घटना की सूचना करीब 45 मिनट बाद तब मिली जब सौरभ को अस्पताल पहुंचाया जा चुका था।
नाहल गांव, जहां यह मुठभेड़ हुई, वह इलाका भूगोल और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। गंग नहर के किनारे बसा यह गांव चंबल के बीहड़ों जैसा है। यहां तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं है और टूटी-फूटी पगडंडी जैसी पटरी से ही वाहन गुजरते हैं, वह भी मात्र 15-20 किमी प्रति घंटा की गति से। इसी वजह से यह इलाका अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन चुका है और बाहरी पुलिस बल को यहां अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
शहीद सौरभ देशवाल ने अपने साहस और कर्तव्यनिष्ठा से न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे पुलिस महकमे को गौरवान्वित किया है। वह पुलिस की उस विरासत का हिस्सा बन गए हैं जो डटकर, बिना डरे अपराधियों से टकराने का साहस रखती है। उनकी शहादत को लंबे समय तक याद किया जाएगा।



