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Shrimad Bhagwat Katha: भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से गुंजायमान हुआ भगवान परशुराम भवन श्रीकृष्ण जन्म एवं वासुदेव लीला ने भावविभोर किए श्रद्धालु

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Shrimad Bhagwat Katha: भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से गुंजायमान हुआ भगवान परशुराम भवन
श्रीकृष्ण जन्म एवं वासुदेव लीला ने भावविभोर किए श्रद्धालु

नई दिल्ली ( सी.पी.एन.न्यूज़ ) : भगवान परशुराम भवन यमुना विहार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा इन दिनों श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम केंद्र बनी हुई है। कथा स्थल पर प्रतिदिन स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्तगण उपस्थित होकर भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का रसपान कर रहे हैं। सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय भजनों, जयघोष एवं श्रद्धा-भाव से सराबोर दिखाई दे रहा है। इस भव्य आयोजन के प्रेरणास्रोत पं. भगवत प्रसाद शर्मा ने बताया कि दिल्ली में भीषण गर्मी एवं लू के बावजूद इतनी विशाल संख्या में श्रद्धालुओं का कथा में पहुंचना सनातन संस्कृति के प्रति जन आस्था एवं भक्ति का जीवंत प्रमाण है।
उन्होंने इसे समाज एवं धर्म के लिए अत्यंत हर्ष एवं गौरव का विषय बताया। कथा के चौथे दिवस अत्यंत भावपूर्ण एवं मार्मिक प्रसंग का वाचन परण चंद उपाध्याय ‘बरसाने वाले’ द्वारा किया गया। भगवान के निर्देशानुसार, वासुदेव जी नवजात कृष्ण को कंस की कैद से निकालकर भारी बारिश और तूफानी रात में उफनती यमुना नदी पार करके गोकुल में अपने मित्र नंदबाबा और यशोदा के घर ले गए। ठीक उसी समय यशोदा माता ने एक कन्या (योगमाया) को जन्म दिया था। वासुदेव जी चुपचाप कृष्ण को वहां सुलाकर उस कन्या को अपने साथ मथुरा ले आए। जैसे ही भगवान की कृपा से कारागार के द्वार स्वतः खुलने तथा प्रहरीगण के निद्रा में लीन होने का प्रसंग आया, सम्पूर्ण पंडाल भक्तिरस में डूब गया। इस अलौकिक लीला का अद्भुत मंचन आज भागवत कथा में प्रस्तुत किया गया। ब्राह्मण समाज संस्था, यमुना विहार के प्रधान व प्रसिद्ध समाजसेवी पं. महेंद्र सिंह पाराशर ने वासुदेव जी की भूमिका का अत्यंत जीवंत, भावपूर्ण एवं हृदयस्पर्शी अभिनय प्रस्तुत किया। नन्हें बालक श्रीकृष्ण को सुसज्जित टोकरी में सिर पर धारण कर घनघोर वर्षा, अंधकारमय वन एवं उफनती यमुना को पार कर नंद बाबा व यशोदा के यहां सुरक्षित पहुंचाने तथा वहां से नवजात कन्या को पुनः मथुरा कारागार में लाने का मंचन इतना आकर्षक एवं भावविभोर कर देने वाला था कि उपस्थित श्रद्धालु भावुक होकर जय-जयकार करने लगे। पूरा प्रांगण “जय श्रीकृष्ण”, “वासुदेव भगवान की जय” एवं “हरि बोल” के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। इस भव्य प्रस्तुति को सफल एवं जीवंत बनाने में पं. नरेंद्र कुमार शर्मा एवं दीपक कुमार शर्मा के अथक प्रयास विशेष रूप से प्रशंसनीय रहे।

उनके समर्पण एवं सूक्ष्म व्यवस्थाओं ने कथा को अत्यंत सुंदर एवं अनुशासित स्वरूप प्रदान किया। विशेष रूप से दीपक कुमार शर्मा एवं उनकी टीम द्वारा पिछले एक पखवाड़े से निरंतर किए जा रहे परिश्रम, सेवा, समर्पण एवं व्यवस्थाओं की सुंदर झलक आज के आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दी, जिसके लिए समस्त समाज ने उनकी मुक्तकंठ से सराहना की। कथा के उपरांत पूर्व विधायक एवं दिल्ली प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष पं. भीष्म शर्मा , पं. राजकुमार शर्मा ‘राजू प्रधान’ , प. यश कुमार शर्मा, प.जयप्रकाश समाधिया, डी. पी. गुप्ता जी, सुभाष चंद शर्मा, रश्मि शर्मा, किशन कुमार शर्मा, ललित शर्मा सहित अनेक गणमान्प अतिथियों का स्वागत सत्कार फूल मालाएं व स्मृति चिन्ह देकर किया गया। अपने उद्बोधन में माननीय पूर्व विधायक ने उपस्थित जनसमूह से भगवान कृष्ण जी के जीवन से सीख लेकर अत्याचार रहित धर्म के पथ पर चलने की सलाह दी। ब्राह्मण समाज संस्था के संयुक्त सचिव पं. जितेंद्र कुमार शर्मा ने इस पावन एवं दिव्य भागवत कथा आयोजन में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वाले सभी श्रद्धालुओं, कार्यकर्ताओं एवं समाज बंधुओं के प्रति हृदय से आभार एवं साधुवाद व्यक्त किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में धर्म के प्रति आस्था जागृत करने तथा चरित्रवान समाज के निर्माण में सहायक सिद्ध होंगे।

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